कासगंज। सिपाही की हत्या और शराब माफिया की मौत के बाद से नगला धीमर में सन्नाटा है। गांव में घटना को लेकर ग्रामीण आपस में चर्चाएं तो कर रहे हैं लेकिन खामोशी भरी जुबां से। हालांकि कुछ ग्रामीणों ने दबी जुबां में बताया कि मोती दहशतगर्द है।
गांव नगला धीमर में सुबह साढ़े नौ बजे एक महिला सिर पर गोबर की परात लिए गुजर रही थी। गली में सन्नाटा था। गांव के दूसरे किनारे पर कुछ लोग घर के बाहर और चौपालों पर बैठे नजर आए। यूं तो लोग घटना को लेकर चर्चा कर रहे थे, लेकिन अपरिचित के पहुंचने पर गांव के लोग तुरंत चुप हो जाते। ग्रामीणों के चेहरों पर मोती की दहशत नजर आ रही थी।
उन्हें डर था यदि किसी के सामने मुंह खोला और मोती को नागवार गुजरा तो उन्हें मोती नहीं छोड़ेगा। हालांकि नाम न छापने की शर्त पर ग्रामीण बोले कि मोती चार भाई हैं। सभी अपराधी किस्म के हैं। कम उम्र से ही मोती अपने भाइयों और साथियों के साथ दहशत का माहौल बनाने लगा था।
वह हमेशा तमंचा लेकर घूमता था। कई बार तो शराब के नशे में उसने गांव में भी तमंचे लहराए थे। वह इतना खूंखार है कि उसके बारे में कुछ भी बताया तो उन्हें और उनके परिवार को खतरा हो सकता है।
रात के सन्नाटे को चीरते रहे हूटर
घटना के बाद रात को पुलिस की गाड़ियां गांव में दौड़ती रहीं। गांव के बीचोंबीच से कई बार रात में हूटर बजाती पुलिस की गाड़ियां गुजरीं तो सर्द भरी रात का सन्नाटा टूटता रहा।
घर खाली, राह देख रहे बेजुबान
एक ओर मोती और उसके साथियों से ग्रामीणों को डर है तो नफरत भी। मोती का साथ तो दूर किसी ग्रामीण ने उसकी बेजुबान बकरियों की भी सुधि नहीं ली। घर के दरवाजे के बाहर माफिया की बकरियां बंधी थीं। भूख-प्यास के कारण वे मिमिया रही थीं।
अड्डे पर थी गोपनीयता, ऑर्डर पर भेजता था शराब
ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त में बताया कि शराब का अवैध कारोबार मोती अपने भाई और साथियों के साथ लंबे समय से कर रहा है। वह कटरी में शराब के अड्डे पर हर किसी को पहुंचने भी नहीं देता था। वह फोन पर ही ऑर्डर लेकर गांव के लोगों को शराब भेजता था। कई बार गांव के कुछ लोग फोन पर ही कच्ची शराब मंगाते थे।