‘माता-पिता को नहीं बचा पाने का दर्द सताता रहेगा’
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरुण जैन ने 30 अप्रैल को अपने पिता सुरेश चंद जैन को खो दिया। अभी डॉ. जैन इस झटके को सहने की हिम्मत जुटा ही रहे थे कि आठ घंटे बाद ही उनकी मां वीना देवी जैन का भी निधन हो गया। अरुण चाइल्ड हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. अरुण कहते हैं कि आज मैं जहां भी खड़ा हूं, वो मेरे माता-पिता के दिए हुए संस्कारों की नींव का परिणाम है। काफी कोशिशों के बाद भी उन्हें नहीं बचा पाने का दर्द जीवनभर सताता रहेगा।
बचपन की शरारतों पर मां की पिटाई और फिर पिता का समझाना जब-जब याद आता है, तो मन विचलित हो उठता है। कई बार पढ़ाई पर मां की डांट भी मुझे यादों के झरोखों में ले जाती है। दर्द व्यक्त नहीं कर सकता। कमरे में अपनी पत्नी डॉ. संध्या जैन के सामने रोकर मन को हलका कर लेता हूं। डॉ. संध्या बताती हैं कि मेरे सास-ससुर ने मुझे बहू नहीं बेटी माना और प्यार दिया। अब सिर्फ यादें ही बाकी हैं।
अपनों के खोने का दर्द: बेटे-बहू की मौत के बाद दो बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रहे दादा-दादी