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शहर बढ़ा, सुविधाएं नहीं: सिकंदरा इंडस्ट्रियल एरिया के लोगों का दर्द, गांव में थे तो कूड़ा उठ जाता था, शहर में वह भी खत्म

Fri, 03 Dec 2021 12:15 PM IST
Abhishek Saxena संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

लोग कहते हैं कि कूड़ा उठता नहीं, सड़कें टूटी पड़ी हैं, स्ट्रीट लाइटें खराब, सिकंदरा इंडस्ट्रियल एरिया में मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे लोग, बोले-पहले कूड़ा तो उठ जाता था अब तो वह भी नहीं होता
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आगरा: सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र के गांव का हाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा सिकंदरा का औद्योगिक क्षेत्र बुरे हाल में है। कूड़ा उठता नहीं, सड़कें टूटी पड़ी हैं और स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। पूर्व में यह इलाका ग्रामीण क्षेत्र में आता था। लोगों के अनुसार तब कम से कम कूड़ा तो उठ जाता था। साल 2019 के विस्तार में नगर निगम सीमा में शामिल किया गया। तो सुविधाएं बढ़ने की जगह कम हो गईं। हजारों लोग यहां काम करते हैं। आसपास एक दर्जन से अधिक रिहाइशी कॉलोनियां भी हैं। 
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गुरुवार दोपहर को अमर उजाला की टीम ने जिले के प्रमुख व्यावसायिक स्थल सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र में सुविधाओं की पड़ताल की। मुख्य सड़क की हालत तो कुछ ठीक थी लेकिन फैक्टरियों की ओर जाने वाले रास्तों में गड्ढे मिले। सीवर उफना रहा था। कूड़े के ढेर से बदबू फैले रही थी। एक जगह तो कूड़े के ढेर में आग लगा दी गई थी। धुआं उठ रहा था। 

सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित कारखानों में दिन और रात की शिफ्टों में काम होता है। नगर निगम ने दावा किया था कि इलाके से हर दिन डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन किया जाएगा लेकिन क्षेत्रीय लोगों ने बताया कि ऐसा नहीं हो रहा है। नगर निगम और उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण कार्यालय में कई बार शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। स्ट्रीट लाइटें खराब होने से रात को इलाके के कई प्लॉटों के आसपास अंधेरा हो जाता है।  
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मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत
कूड़ा नहीं उठाए जाने के संबंध में क्षेत्रीय लोगों ने मुख्यमंत्री के शिकायत पोर्टल पर भी समस्या बताई। लेकिन समाधान नहीं हुआ, समस्या जस की तस बनी हुई है। 

पार्कों का बुरा हाल 
इंडस्ट्रियल एरिया की साइट ए में 55, बी में 36 और सी में 300 प्लॉट हैं। उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने सभी प्लॉट का आवंटन कर दिया है। क्षेत्र में कई पार्क स्थापित किए गए थे। मुख्य रोड पर वन विभाग ने एक पार्क को व्यवस्थित किया है लेकिन अन्य पार्कों की स्थिति खराब है। झाड़ियां उग आई हैं। पार्कों के बाहर ही कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। 
नहीं जलतीं स्ट्रीट लाइटें 
क्षेत्र में सड़कें जर्जर हो गई हैं। जगह-जगह गड्ढे हैं। रात में तमाम स्ट्रीट लाइटें जलती नहीं हैं। गड्ढों में गिरकर लोग घायल हो जाते हैं। -राजेंद्र मगन

इलाके की अनदेखी 

हजारों लोग काम करते हैं। सैकड़ों लोग रहते हैं फिर भी इलाके की अनदेखी की जा रही है। कूड़ा तो उठवाएं, पहले सफाई तो हो जाती थी।  -शिवम कुमार 

बदबू मारते कूड़े के ढेर

ग्रामीण क्षेत्र में जब यह इलाका था, तब कूड़ा तो उठ जाता था। अब तो कूड़े के ढेर बदबू मारते रहते हैं। कोई इन्हें उठाने नहीं आता।  -दीपक गुप्ता 
निगम में सुनवाई नहीं

नगर निगम में संपर्क किया था। बोला गया कि बजट जारी होते ही काम हो जाएंगे। लेकिन कुछ नहीं हुआ। निगम में सुनवाई नहीं हो रही। -विशाल कुमार 

शहर बढ़ा, सेवाएं नहीं: नगर निगम में शामिल पर सुविधाओं का इंतजार, मुंह चिढ़ा रही टूटी सड़कें, गंदगी के ढेर

 
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