सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक साथ सारे मरीज की ऑक्सीजन कैसे कम की जा सकती है, जबकि हर मरीज का ऑक्सीजन लेवल अलग होता है। कोरोना में मरीजों की ऑक्सीजन का लेवल भी अलग-अलग स्तर पर होगा। ऐसे में एक साथ मरीजों की ऑक्सीजन वायरल वीडियो के मुताबिक, कैसे बंद की जा सकती है। इस बिंदु पर पुलिस अपनी जांच बढ़ाए तो पुलिस के सामने अहम तथ्य आ सकते हैं।
10 दिन में मंगाई जा सकती है डीवीआर की एफएसएल रिपोर्ट
सेवानिवृत्त डीआईजी महेश कुमार मिश्र ने बताया कि पुलिस ने अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों की डीवीआर को कब्जे में लिया है। अगर, पुलिस प्रमुखता पर रखकर लैब को पत्र लिखे तो सात से दस दिन में रिपोर्ट मिल सकती है। इसमें क्या फुटेज आए होंगे, इसके बारे में पता चल जाएगा। सामान्य मामलों में एफएसएल से महीनों तक रिपोर्ट मिलना मुश्किल होता है। उधर, पुलिस आज डीवीआर को फोरेंसिक साइंस लैब में भेजेगी।
कहां गया पुलिस की कोरोना सेल का रिकॉर्ड
कोरोना काल में मरीजों की संख्या और परिवार की स्थिति का पता करने के लिए कोरोना सेल का गठन किया गया था। कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट आने के बाद जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम फोन करके मरीज की स्थिति का पता करती थी। नगर निगम की टीम सैनिटाइजेशन करती थी, वहीं पुलिस की कोरोना सेल भी मरीज से जानकारी लेती थी। फोन करके परिवार की स्थिति के बारे में पूछा जाता था। श्री पारस अस्पताल में कितने मरीज भर्ती हुए, कितने डिस्चार्ज हुए, कितनों की मौत हुई, यही भी पुलिस की कोरोना सेल में उपलब्ध होगा। मगर, अभी तक कोरोना सेल के रिकॉर्ड को चेक नहीं किया गया है।
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