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आगरा: राजगढ़ के लिए मशाल रवाना, शिवाजी के सेनापतियों के वंशजों ने कोठीमीनाबाजार की रज माथे पर लगाई

Tue, 17 Aug 2021 03:14 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

शिवाजी के वंशजों ने आगरा किला स्थित उनकी प्रतिमा का अभिषेक भी किया। आगरा से राजगढ़ के लिए मशाल रवाना हुई। शिवाजी आगरा से राजगढ़ तक जहां-जहां रुके थे, वहां-वहां कार्यक्रम किए जाएंगे।
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शिवाजी के सेनापतियों के वंशजों के साथ भाजपा विधायक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में मंगलवार को छत्रपति शिवाजी महाराज के सेनापतियों और सिपहसालारों की चौदहवीं पीढ़ी के वंशज कोठी मीना बाजार पहुंचे। वे वहां पहुंचकर भावुक हो उठे। वंशजों ने रज को माथे से लगाकर वंदन किया। बता दें कि यहीं से शिवाजी शक्तिशाली मुगल साम्राज्य की सुरक्षा व्यवस्था को धता बताकर बचकर निकले थे। शिवाजी के वंशजों ने आगरा किला स्थित उनकी प्रतिमा का अभिषेक भी किया। आगरा से राजगढ़ के लिए मशाल रवाना हुई। शिवाजी आगरा से राजगढ़ तक जहां-जहां रुके थे, वहां-वहां कार्यक्रम किए जाएंगे।

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शिवाजी महाराज की सेना में रहे प्रमुख स्वंतसलाहकार सरनौबत नरवीर पिलाजी गोल व महान सेनानी सरदार कान्होजी जेधे के वंशज मारूति आबा गोले, दिग्विजय जेधे व जाधव घराने के वंशज गणेश जाधव व तानाजी मालसुरे के वंशज महेश मालसुरे 72 सदस्यीय दल के साथ मंगलवार को ताजनगरी पहुंचे।

उन्होंने राजगढ़ से आगरा तक यात्रा कर शिवाजी के 55 किलों के जलकुंभों के जल से शिवाजी की प्रतिमा का अभिषेक करने, राजगढ़ से आगरा तक जहां-जहां शिवाजी ने पड़ाव किया था, वहां-वहां राजगढ़ की मिट्टी, 55 किलों के जल से अभिषेक और दो हजार पौधे लगाने का निश्चय किया था। आगरा किला स्थित शिवाजी के प्रतिमा स्थल पर सिंहासनारूढ़ शिवाजी की प्रतिमा का अभिषेक किया गया। यह प्रतिमा दल अपने साथ लेकर आया था। मुख्य अतिथि विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने मशाल प्रज्जवलित की, जिसे दल राजगढ़ लेकर जाएगा।

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शिवाजी के सेनापतियों के वंशजों के साथ भाजपा विधायक - फोटो : अमर उजाला
प्रेरणास्थल के रूप में होगा विकसित
भाजपा विधायक योगेंद्र उपाध्याय ने दल को बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से कोठी मीना बाजार को शिवाजी महाराज के प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। आगरा के निर्माणाधीन मुगल म्यूजियम का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज म्यूजियम कर दिया है ये जानकारी भी दी गई।

औरंगजेब की कैद से निकले थे शिवाजी
पुरंदर की संधि के बाद छत्रपति शिवाजी महाराज, जयपुर के मिर्जा राजा जयसिंह के वचन पर आगरा आए थे। यहां औरंगजेब से आगरा किला स्थित दीवान-ए-खास में मिले थे। उचित सम्मान नहीं मिलने पर शिवाजी नाराज होकर दरबार छोड़कर चले गए। इस पर औरंगजेब ने उन्हें बंदी बनाकर रामसिंह की छावनी के निकट टीले पर स्थित हवेली में रखा था। इतिहास संकलन समिति ने कोठी मीना बाजार की जगह पर ही शिवाजी को बंदी बनाकर रखे जाने का दावा शोध में किया है। शिवाजी ने आगरा में मुगल दरबार में पहुंचने से पूर्व अंतिम पड़ाव मलूकचंद की सराय में डाला था।
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