कोरोना काल में सावन भी सूना-सूना है। लेकिन चंबल के गांवों में यह सन्नाटा सेवन सिस्टर बर्ड्स की चहचहाहट से टूट रहा है। यह नाम तो इन्हें अंग्रेजी में दिया गया है, क्योंकि ग्रे रंग की ये चिड़िया सात बहनें होती हैं और हमेशा साथ ही रहती हैं। चंबल में इन्हें सतबहना के नाम से भी जाना जाता है। जबकि इनका जूलॉजिकल नाम ग्रे बेबलर है।
यूपी के बाह, इटावा, एमपी के भिंड, मुरैना से लेकर राजस्थान के धौलपुर तक चंबल किनारे के गांवों में सेवन सिस्टर बर्ड्स की मौजूदगी है। बाघराजपुरा के गांव के धीरेंद्र पाल सिंह, देवेंद्र सिंह भदौरिया, भगवानपुरा के दिलीप वर्मा, गोहरा के राकेश यादव, हरलालपुरा के रामवीर ने बताया कि यह चिड़िया उड़ान भी समूह में भरती है।
इनका प्रजनन बारिश के दिनों में होता है। बाह के रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि उत्तर भारत में प्रजनन काल जुलाई और सितंबर में होता है। तीन से चार अंडे देती है। कीड़े, अनाज और जामुन इनका भोजन होते हैं।