डकैती के दोषी सात बदमाशों को 10 साल की सजा
- करहल में सात साल पहले मां-बेटी को भी किया था घायल
संवाद न्यूज एजेंसी
मैनपुरी। करहल में सात साल पहले घिरोर चौराहे पर एक मकान में डकैती डालकर लूटपाट करने, विरोध करने पर मां-बेटी को घायल करने वाले सात बदमाशों को स्पेशल जज डकैती पूनम राजपूत ने 10-10 साल की सजा सुनाई है। उन पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाने के बाद सातों को जेल भेजा गया है।
करहल के घिरोर चौराहा के पास रहने वाले सुभाषचंद्र के मकान में घुसकर 24/25 अक्तूबर 2016 की रात को डकैती डाली गई थी। घर में घुसे डकैतों ने नगदी और जेवर लूट लिए। विरोध करने पर सुभाष की पत्नी मीना, पुत्री छाया तथा राजबहादुर को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। सुभाष ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच करके खानाबदोस सारिक उर्फ गोली निवासी डेरा थाना बड़ौत जिला बागपत, साबिर उर्फ मिथुन, तैयब, सहरान, मोईन निवासी डेरा थाना गंगोह जिला सहारनपुर, महबूब उर्फ मुन्ना, आशिक निवासी डेरा सरैया थाना बिधूना जिला औरैया को पकड़कर जेल भेज दिया। उनके कब्जे से लूटा गया माल भी बरामद किया गया।
पुलिस ने सभी के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में भेज दी। मुकदमे की सुनवाई स्पेशल जज डकैती पूनम राजपूत की कोर्ट में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से वादी, विवेचक, चिकित्सक, घायलों सहित गवाहों ने कोर्ट में गवाही दी। गवाही के आधार पर सातों को डकैती डालने का दोषी पाया गया। एडीजीसी राकेश कुमार गुप्ता और रोहित शुक्ला ने डकैती डालने वाले सातों को कड़ी सजा देने की दलील दी। स्पेशल जज डकैती पूनम राजपूत ने सात लोगों को स्पेशल जज डकैती पूनम राजपूत ने 10-10 साल की सजा सुनाई है। उन पर 20-20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। सजा सुनाने के बाद सातों को जेल भेजा गया है।
जेल में रहकर लड़ा पूरा मुकदमा
डकैती डालने वाले सातों इटावा और कन्नौज की जेल में बंद हैं। उनकी किसी भी अदालत से जमानत मंजूर नहीं हुई। उनको पूरा मुकदमा जेल में रहकर ही लड़ना पड़ा। मंगलवार को सहरान को इटावा जेल से तथा सारिक उर्फ गोली, साबिर उर्फ मिथुन, तैयब, मोईन, महबूब उर्फ मुन्ना, आशिक को कन्नौज जेल से मुकदमे का निर्णय सुनने के लिए उनको जेल से ही अदालत लाया गया। सजा होने पर उनको अदालत से ही जेल भेज दिया गया।