बिछवां। यदि हमसे कोई गलती हो जाए तो सच्चे मन से प्रायश्चित कर हम आत्म शांति पा सकते हैं। अपनी गलती में सुधार करने की गुंजाइश भी बनने लगती है। ऐसा कोई कार्य न करें, जो दूसरों के लिए पीड़ा का कारण बन जाए। ये बातें विकास खंड सुल्तानगंज के गांव दिलीपपुर कैलई स्थित प्राचीन मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचिका रश्मि शास्त्री ने कहीं।
उन्होंने कहा कि मनुष्य से गलती हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन ऐसा होने पर समय रहते सुधार और प्रायश्चित जरूरी है। ऐसा नहीं हुआ तो गलती पाप की श्रेणी में आ जाती है। उन्होंने कहा कि परीक्षित कलयुग के प्रभाव के कारण ऋषि से श्रापित हो जाते हैं, उसी के पश्चाताप में वह शुकदेव जी के पास जाते हैं। कहा कि भक्ति एक ऐसा उत्तम निवेश है, जो जीवन में परेशानियों का उत्तम समाधान देती है। इस मौके पर परीक्षित रवींद्र सिंह, यज्ञपति ब्रजवीर सिंह, अखंड प्रताप सिंह, संपूर्णानंद पांडेय आदि मौजूद रहे।