ओपीडी में 3,887 मरीज आए। इसमें 1,387 नए और 2,200 पुराने मरीज रहे। सबसे ज्यादा मेडिसिन विभाग में 721 मरीज आए। मेडिसिन विभाग के डॉ. अजित चाहर ने बताया कि भीषण गर्मी और बाहर का दूषित भोजन करने से उल्टी-दस्त, पेट में दर्द के मरीज सबसे ज्यादा हैं। कई ऐसे मरीज भी आए, जिनको चक्कर आ रहे थे। सिरदर्द हो रहा था और शरीर में पानी की कमी भी मिली। ऐसे 8-10 मरीजों को भर्ती किया। इमरजेंसी में भी ऐसे रोजाना 10-12 मरीज आ रहे हैं। राहत की बात है कि प्रारंभिक इलाज देने के बाद 24 घंटे में ठीक हो रहे हैं।
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त्वचा रोग विभाग के डॉ. यतेंद्र चाहर ने बताया कि तेज धूप और गर्मी से सन बर्न, लाल दाने, चकत्ते, खुजली-जलन के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। धूप के सीधे संपर्क वाले हिस्सों पर झाइयां, चकत्ते, लाल दाने, खुजली की परेशानी मिल रही है। इनमें कामकाजी लोग अधिक हैं, जो अधिकतर समय कार्यालय-घर के बाहर रहते हैं।
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दवाओं की कमी, बाहर से खरीद रहे मरीज
एसएन के मरीज दवाओं की कमी से भी जूझ रहे हैं। इसमें त्वचा रोग, हड्डी रोग, हृदय रोग , पेट रोग समेत कई बीमारियों की पर्चे पर लिखी सभी दवाएं नहीं मिल पा रही हैं। मरीज इनको खरीदने के लिए मजबूर हैं। प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता का कहना है कि दवाओं का ऑर्डर कर दिया है, इसी सप्ताह से मिलने लगेंगी।
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ये बोले मरीज: 7 में से चार दवाएं ही मिलीं
धनौली की राजकुमारी ने बताया कि हड्डी की परेशानी में दिखाने आई। डॉक्टर साहब ने पर्चे पर 7 दवाएं लिखीं, जिसमें काउंटर से चार दवाओं की पर्ची बनाई, बाकी खरीदने के लिए कहा।
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