नोटिस भेजे गए, लेकिन नहीं मिला कोई जवाब
बैंक से 22 लोगों के नाम पर 34.68 लाख का ऋण लिया गया था। इसमें उनके कागजात लगाए गए। जेवरात भी रखे गए। ऋण लेने के बाद भी बैंक में किस्त जमा नहीं हो रही थीं। इस पर ऋणदाताओं के पते पर बैंक की तरफ से नोटिस भेजे गए। मगर, कोई जवाब नहीं मिला। बाद में रिकवरी टीम को भेजा गया। मगर, उक्त पते पर कोई नहीं मिला। बैंक ने दूसरे सराफ से जेवरात की जांच कराई। इसमें नकली होने का पता चला।
कीमत से अधिक ले लिया लोन
सामने आया कि जो जेवरात बैंक में गिरवी रखे गए उनका षड्यंत्र के तहत गलत आकलन आरोपी प्रदीप कुमार और गिरीशचंद ने किया था। अत्यधिक कीमत बताई गई थी। वर्तमान दर से अधिक कीमत लगाई गई। जेवरात के नकली होने पर भी कीमत से अधिक ऋण प्राप्त कर लिया।
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मजदूरों से लिए थे दस्तावेज
थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद कुमार ने बताया कि बैंक में जो दस्तावेज लगाए गए, वो मजदूरों के हैं। मजदूरों को ऋण दिलाने का आश्वासन दिया गया था। मगर, उन्हें कोई ऋण नहीं दिया गया। आधार कार्ड भी फर्जी लगाए थे। जेवरात भी नकली थे। आरोपियों की तलाश की जा रही है।
इनके नाम पर लिया ऋण
ऋण के लिए अचल शर्मा, नीरज पटेल, धर्मेंद्र सिंह, सुरेश चौधरी, बृजकिशोर, कैलाश सिंह, विशाल, मनीष विसन, भूरी सिंह, अर्जुन सिंह, अमर सिंह, अजय विक्रम सिंह, राजल सिंह, नरेंद्र शर्मा, शकुंतला देवी, प्रीति चौधरी, मौजीराम, राजेश कुमार, धर्मेंद्र कुमार, नाथू सिंह, दीपक कुमार, लाखन सिंह नाम के दस्तावेज लगाए गए थे।
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