आंखों से छलक पड़े आंसू
लालऊ गांव में अनीता के घर मंगलवार की शाम अमर उजाला टीम पहुंची। घर पर उस समय बेटी प्रज्ञा और बेटा प्रवीन थे। उन्होंने बताया कि मां घर पर नहीं हैं। खेत पर काम करने गई हैं। पिता हरेंद्र सिंह फैक्टरी में काम करने के लिए गए हैं। रिपोर्टर ने प्रज्ञा और प्रवीन को बताया कि संजलि हत्याकांड में फैसला आ गया है। दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। बेटी प्रज्ञा मां के पास गई। उन्हें फैसले की जानकारी दी। अनीता की आंखों से आंसू निकल आए। उन्होंने घर आकर संजलि की फोटो पर फूल चढ़ाए। फिर रोने लगीं।
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क्या नहीं करना पड़ा, तब दिलाई सजा
बोलीं कि बेटी के हत्यारोपियों को सजा दिलाने के लिए क्या-क्या नहीं करना पड़ा। घटना के बाद गांव में जनप्रतिनिधि से लेकर आला अफसर पहुंचे थे। किसी ने हत्यारोपियों की गिरफ्तारी की मांग की तो किसी ने मुआवजे का आश्वासन दिया। जिलाधिकारी की ओर से राहत कोष से 5 लाख रुपये दिए गए। लेकिन उन्होंने एक करोड़ रुपये और सरकारी नाैकरी की मांग की थी, जो आज तक पूरी नहीं हो सकी। हर कोई बस झूठे आश्वासन देकर चला गया। केस में पैरवी के लिए वकील के दफ्तर से लेकर कोर्ट के चक्कर काटने पड़ते थे। जो मुआवजा मिला, वह खर्च हो गया।
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कानूनी लड़ाई के लिए लेने पड़ा कर्ज
कानूनी लड़ाई लड़ने के लिए कर्ज लेना पड़ गया। इस कारण पति-पत्नी को मजदूरी करनी पड़ रही है। बेटी की हत्या में रिश्तेदार ही शामिल था। उन्हें सजा दिलाने के लिए रिश्तेदारों से भी नाता तोड़ना पड़ा। कई बार समझाैते का दबाव डाला गया। लेकिन वो पीछे नहीं हटे। बेटी को न्याय दिलाने की खातिर लड़ाई लड़ते रहे। उसी का नतीजा है कि कोर्ट ने उन्हें सजा दी। लेकिन दोषियों को फांसी की सजा मिले तो सुकून आएगा। इसके लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके लिए फिर कर्ज लेना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।
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