विधानसभा के चुनावी मैदान में सपा ने हर बार मैनपुरी की चारों सीटों पर जातिगत चक्रव्यूह की रचना की। इसी चक्रव्यूह का नतीजा रहा कि अधिकांश सीटों पर जहां सपा की बादशाहत लगातार कायम रही। वहीं अन्य सीटों पर भी हर बार बाजी पलटती रही। इस बार भी सपा इसी चक्रव्यूह के सहारे बिसात बिछा चुकी है। ये व्यूह रचना कितनी कारगर साबित होगी यह परिणाम आने पर पता चलेगा।
मैनपुरी जिले में कुल चार विधानसभा सीटें हैं, इसमें मैनपुरी सदर, भोगांव, किशनी और करहल शामिल हैं। मैनपुरी और करहल सीटें जहां यादव बाहुल्य हैं तो वहीं भोगांव सीट शाक्य और किशनी सीट अनुसूचित जाति बाहुल्य है। 1992 में मुलायम सिंह यादव ने अपनी पार्टी बनाई, जिसे उन्होंने समाजवादी पार्टी नाम दिया। पार्टी अपनी थी तो अपनी कर्मभूमि में परचम लहराने से मुलायम सिंह यादव पीछे नहीं रहे।
पहली बार में उन्होंने तीन सीटें सपा के खाते में शामिल करा लीं। इसी चुनाव से उन्होंने मैनपुरी के सियासी कुरुक्षेत्र की पूरी किलेबंदी भांप ली थी। इसके बाद उन्होंने हर चुनाव में जीत हासिल करने के लिए जातिगत चक्रव्यूह की रचना की और मैनपुरी की सीटों पर अपनी बादशाहत कायम रखी।