सूरजपाल भले ही मूलरूप से बहादुर नगर, पटियाली, एटा के रहने वाले थे, लेकिन उन्होंने अपना कथित आध्यात्मिक सफर आगरा से ही शुरू किया था। 1990 के दशक में वह एसपीआर कार्यालय, आगरा में सिपाही थे। उनके साथ काम करने वाले पूर्व कर्मचारी ने बताया कि सूरजपाल अलग-अलग सत्संग में जाने लगे। एक दिन अपने वालंटियर बना लिए। इसके वाद सत्संग शुरू कर दिया। छोटे से बड़े पंडाल बनने लगे। गली-मोहल्ले के बाद गांव-गांव में अनुयायी बन गए। इनमें दलित वर्ग के लोगों की संख्या अधिक होती थी। कोई बीमारी से ठीक होने के लिए प्रार्थना करता तो कोई काम धंधे चलाने के लिए गुहार लगाता था। अनुयायी बढ़े तो सूरजपाल ने अपनी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया। देखते ही देखते बाबा ने वंचितों के मसीहा के रूप में अपना स्थान बना लिया।
भगदड़ का शिकार लोग बोले- सेवादार मदद की बजाय कह रहे थे साकार हरि पुकारो
सत्संग खत्म होने के बाद जब एक लाख की भीड़ पंडाल से निकलकर हाईवे की तरफ बढ़ी तब भीड़ के दबाव में बुजुर्ग महिलाओं को सांस लेने में तकलीफ होने लगी थी। इसी दौरान भगदड़ मच गई तो यह महिलाएं भीड़ में फंस गई और मदद के लिए पुकारने लगीं। यहां मौजूद सेवादार इन महिलाओं को भीड़ से सुरक्षित निकालने की बजाए कहने लगे....कुछ नहीं होगा, नारायण साकार हरि पुकारो। बाबा मदद करेंगे। अस्पतालों में भर्ती रहीं महिलाओं ने पुलिस की जांच में यह बयान दर्ज कराए हैं।
पीड़ितों ने बयां की आपबीती
सिकंदराराऊ के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में 2 जुलाई को आयोजित भोले बाबा के सत्संग में एक लाख से अधिक भीड़ पहुंची थी। प्रशासन का जो मानना है उसके मुताबिक 50 हजार से ज्यादा भीड़ महिलाओं की थी। सत्संग भले ही 12 बजे से शुरू हुआ था लेकिन दूरदराज से पहुंची महिलाएं सुबह को 7 बजे से ही पंडाल में पहुंच गईं थीं। उस वक्त गर्मी बहुत थी और उमस से यहां मौजूद लोग परेशान हो रहे थे। दोपहर को जब सत्संग खत्म हुआ तो महिलाएं जाने लगीं।
शुगर की मरीज हैं। उन्होंने बताया कि वह अपने देवरानी के साथ आईं थीं। भीड़ के बीच उन्हें सांस लेने में परेशानी होने लगी। अब इतनी भीड़ के बीच से निकलते कैसे। तभी सेवादार की वर्दी पहने खड़े दो लोगों को उनकी देवरानी बुलाकर लाईं और मदद मांगी। मगर वह यह कहकर वहां से चले गए कि बाबा को पुकारो। शक्ति आ जाएगी। झारखंड की गोमती देवी तीन महिलाओं के साथ यहां आईं थीं। उनकी उम्र 55 साल है। गोमती ने पुलिस को बताया कि सेवादार डंडे से भीड़ को हांक रहे थे। होना यह चाहिए था कि पहले महिलाओं को निकालते। लेकिन सभी को एक साथ निकाला जा रहा था। उनकी भी तबीयत बिगड़ गई थी। वह पंडाल में ही गिर गई थी। दो महिला सेवादार आईं और कहने लगीं कि बाबा का नाम लेकर थोड़ा पानी पी लो। आराम मिलेगा।