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वृंदावन कुंभ: दूसरे शाही स्नान से पहले यमुना में शुद्ध जल लाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

Tue, 02 Mar 2021 12:12 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
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वृंदावन कुंभ बैठक मेला 2021: यमुना किनारे श्रद्धालुओं की भीड़ - फोटो : अमर उजाला
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तीर्थनगरी वृंदावन में कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक का पहला शाही स्नान हो चुका है। इस दौरान यमुना में गंदा पानी होने के कारण काफी संख्या में साधु-संतों ने स्नान भी नहीं किया था। यमुना के स्वच्छ जल को लेकर ब्रजवासियों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है। अब दूसरा शाही स्नान नौ मार्च को है। इससे पहले यमुना में शुद्ध जल लाकर साधु-संतों और श्रद्धालुओं को संतुष्ट करना प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है।

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यमुना में शुद्ध जल को लेकर सोमवार को कुंभ क्षेत्र स्थित कालिंदी सेवा संस्थान में सर्वोदय ब्राह्मण विकास संस्थान द्वारा आयोजित बैठक में भागवताचार्य श्रीराम शर्मा की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सोहनलाल शर्मा ने नौ मार्च को आयोजित होने वाले दूसरे शाही स्नान से पूर्व यमुना में जलस्तर को बढ़ाने की आवश्यकता जताई। जिससे साधु समाज अखाड़ा परिषद महंत भक्तगण को स्नान करने में संकोच न हो। स्वच्छ जल में स्नान हो सके। 

नारायण प्रसाद शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री को इसका संज्ञान लेते हुए यमुना में शुद्ध जल छुड़वाना चाहिए। उन्होंने कुंभ क्षेत्र में प्रकाश और सफाई व्यवस्था आदि के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। बैठक में कालिंदी सेवा संस्थान के अध्यक्ष भागवत आचार्य गोपाल, विश्व हिंदू परिषद के आचार्य बृजेंद्र नागर, ब्रह्म भारती के आचार्य महेंद्र दत्त, सर्वोदय ब्राह्मण विकास संस्थान की जिला अध्यक्ष डॉ. जमुना शर्मा, पूनम शुक्ला, कमल पचौरी, टीकाराम शर्मा उपस्थित रहे।

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कुंभ में अब बढ़ेगी संतों और श्रद्धालुओं की संख्या 
माघ पूर्णिमा पर पहला शाही स्नान था। वृंदावन कुंभ मेला में बड़ी संख्या में साधु इसलिए नहीं आ पाए थे क्योंकि उन्होंने प्रयागराज में स्नान किया। वे सभी साधु संत अब वृंदावन कुंभ में शामिल होंगे। धीरे-धीरे संतों का आना शुरू हो गया है। पहले शाही स्नान के दौरान काफी संख्या में संतों ने यमुना में डुबकी इसलिए नहीं लगाई क्योंकि यमुना का पानी काफी गंदा था। इसको लेकर नाराजगी भी जताई थी और सीएम से शिकायत भी की गई थी।

दूसरे शाही स्नान तक यमुना में शुद्ध जल की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती है। साधु-संतों की नाराजगी प्रशासन पर भारी भी पड़ सकती है। क्योंकि 14 फरवरी को जब सीएम देवरहा घाट का उद्घाटन करने आए थे तो उन्होंने वादा किया था कि यमुना में संतों के लिए शुद्ध पानी की व्यवस्था की जाएगी।
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