अमांपुर (कासगंज)। सहकारी समितियों पर डीएपी की किल्लत के चलते निजी खाद विक्रेताओं के द्वारा डीएपी की मनमानी कीमत किसानों से वसूली जा रही है। किसानों की मानें तो 1200 रुपये प्रति बोरी के स्थान पर खाद विक्रेता 1300 रुपये से 1400 रुपये तक वसूल रहे हैं। जिससे किसानों की लागत बढ़ रही है।
दो दिन पूर्व हुई बारिश के बाद खेतों में नमी आ गई है। जिससे किसानों ने रबी की फसल की बुवाई के लिए तैयारी शुरु कर दी है। ऐसे में किसानों को डीएपी की आवश्यकता है। निजी खाद विक्रेताओं ने डिमांड बढ़ने के साथ ही दामों को भी बढ़ा दिया है। मुनाफाखोर खाद विक्रेताएक बोरी पर 200 से 300 रुपये अधिक वसूल रहे है। मजबूर किसानों को लाह और आलू की बुवाई के लिए महंगी डीएपी खरीदनी पड़ रही है। सहकारी समितियों पर खाद की किल्लत होने के चलते किसान निजी खाद विक्रेताओं से डीएपी को खरीदने के लिए विवश हैं।
बिक्री की रसीद नहीं दे रहे विक्रेता
निजी खाद विक्रेता निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री कर रहे हैं। जब किसान उनसे रसीद मांगते हैं, तो किसानों को रसीद नहीं दी जाती। अधिक मांगने पर निर्धारित मूल्य की रसीद दे दी जाती है। जिससे कहीं कोई शिकायत न की जा सके।
लगभग 20 बीघा खेत को लाह की बुवाई के लिए तैयार किया गया है। लेकिन डीएपी बाजार में निर्धारित मूल्य से अधिक मूल्य पर मिल रही है। 1200 रुपये प्रति बोरी के स्थान पर खाद विक्रेता 1300 से 1400 रुपये तक वसूल रहे हैं। - आशीष चौहान, किसान
10 बीघा खेत तैयार कर लिया है। जिसमें लाह की बुवाई करनी है। लेकिन सहकारी समितियों पर खाद नहीं मिल रही है और निजी खाद विक्रेताओं निर्धारित मूल्य से अधिक पर डीएपी बेच रहे हैं। ये विक्रेता खरीद की रसीद तक नहीं दे रहे है। - राजकुमार, किसान
किसानों के जख्मों पर मरहम
700 एमटी खाद शीघ्र ही जनपद पहुंचेगी। 300 एमटी खाद की रैक एनएफएल के द्वारा 9 अक्तूबर को भेजी जा रही है। जबकि 10 अक्तूबर को 400 एमटी खाद की रैक आईपीएल के द्वारा भेजी जा रही है। जिससे खाद की किल्लत नहीं रहेगी। वहीं निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री किए जाने की शिकायत अभी नहीं मिली है। फिर भी सहायक कृषि अधिकारी को भेजकर चेकिंग कराई जाएगी। यदि कोई निर्धारित मूल्य से अधिक पर बिक्री करता हुआ मिला तो उसके खिलाफ विधिक कार्रवाई होगी। - सुमित कुमार चौहान, जिला कृषि अधिकारी