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जेपी इन्फ्राटेक से वसूले जाएंगे 18 करोड़ रुपये, जानिए क्या है मामला

Sat, 10 Aug 2019 09:16 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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यमुना एक्सप्रेसवे - फोटो : अमर उजाला
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9.123 हेक्टेयर वन भूमि के इस्तेमाल करने और यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर 24 हजार पेड़ न लगाने के मामले में वन विभाग ने जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ आरसी जारी करने की सिफारिश की है।
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वन विभाग ने जिलाधिकारी आगरा को जेपी इन्फ्रा से 18.66 करोड़ रुपये की आरसी जारी करने के लिए फाइल भेज दी है। जेपी इन्फ्रा ने 2011-12 में पौधे लगाने का करार किया था, लेकिन अब तक एक्सप्रेसवे के किनारे पौधे नहीं लगाए।

आगरा क्षेत्र के वन संरक्षक रहे जावेद अख्तर और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अभय कुमार सिंह ने पौधे न लगाने के एवज में जेपी इन्फ्राटेक से वसूली के लिए लगातार कवायद की।
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अमर उजाला ने शासन में जब यह मामला उछाला तो प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण कल्पना अवस्थी ने फाइलें तलब कीं और डीएफओ को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद ही वन विभाग ने स्थानीय स्तर पर आरसी जारी करने के लिए डीएम से सिफारिश कर दी।
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डीएफओ मनीष मित्तल ने बताया कि यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर तीन लेयर में पौधे लगाने के लिए जेपी इन्फ्राटेक ने करार के मुताबिक काम नहीं किया।

जेपी इन्फ्रा से कई बार पत्र लिखकर 18.66 करोड़ रुपये जमा कराने को कहा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। अब उनसे इस रकम की वसूली के लिए जिलाधिकारी को आरसी जारी करने के लिए संस्तुति की है।

एक्सप्रेसवे का टोल संचालित कर वसूली का विकल्प
यमुना एक्सप्रेसवे पर हरियाली के लिए 18.66 करोड़ रुपये जमा न करने की स्थिति में एक्सप्रेसवे का टोल संचालित कर वसूली का विकल्प भी अधिकारियों ने तलाशा है। लखनऊ के अधिकारी टोल से गुजरने वाली गाड़ियों और उनसे हर माह की वसूली का ब्योरा भी मांग चुके हैं।

शासन के सूत्रों के मुताबिक आरसी जारी करने पर भी जेपी ग्रुप ने अगर देनदारी न चुकाई तो टोल प्लाजा संचालित कर वसूली की जा सकती है। इस संबंध में कानूनी पहलुओं पर शासन में चर्चा चल रही है।
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छह साल बाद आई जेपी इन्फ्रा से रिकवरी की याद
जेपी इन्फ्राटेक ने नोएडा से आगरा तक 165 किमी लंबा यमुना एक्सप्रेसवे 2012 में शुरू किया। छह लेन वाले यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे जेपी इन्फ्रा को करार के तहत 24 हजार पेड़ लगाने थे, लेकिन कंपनी ने 2018 तक पौधे ही नहीं लगाए।

जांच कमेटी के सत्यापन दौरान यह तथ्य सही पाए गए। इसके बाद 2018 से ही आगरा के वन संरक्षक ने जेपी इन्फ्राटेक से 18.66 करोड़ रुपये वसूलने की प्रक्रिया शुरू कर दी।
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