पर्यावरण मंत्रालय ने पुरानी सूची में संशोधन करते हुए व्हाइट कैटेगरी में 86 उद्योग शामिल किए हैं। इनमें 15 से ज्यादा वह उद्योग शामिल हैं जो अब तक ग्रीन कैटेगरी यानी हरित श्रेणी में शामिल थे। थर्मामीटर, साबुन, डिटरजेंट, घरेलू हार्डवेयर, धागे, डोरियां, गारमेंट, सूती और ऊनी होजरी, फाउंटेन पेन का निर्माण, स्प्रे पेंट के बिना लकड़ी और स्टील का फर्नीचर, हॉलमार्किंग, टेप, बर्तन आदि की निर्माण इकाइयां अब व्हाइट कैटेगरी का हिस्सा बना दी गई हैं।
पर्यावरण मंत्रालय ने 10,400 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले ताज ट्रेपेजियम जोन में केवल व्हाइट कैटेगरी के उद्योग लगाने की अनुमति दी थी। वर्ष 2016 से लेकर बीते साल 2024 तक इसी सूची के मुताबिक आगरा में व्हाइट कैटेगरी में शामिल उद्योगों को ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला उद्योग केंद्र से स्थापना की अनुमति दी गई।
बीते सप्ताह पर्यावरण मंत्रालय ने नई अधिसूचना जारी की, जिसमें 36 की जगह अब 86 उद्योग शामिल किए गए हैं। इनमें खेल सामग्री बनाने, शैंपू, टूथपेस्ट, पाउडर, परफ्यूम, सैनिटरी नैपनिक, 5 मशीनों से कम फ्लेक्स, पीवीसी प्रिंटिंग, डिटरजेंट, टेप, सोने की जांच, हॉलमार्किंग, रेलवे साइडिंग, सीमेंट उत्पाद जैसे पाइप, खंभा, कुआं रिंग, मवेशी आहार निर्माण, चमड़े के जूते और उत्पाद बिना टैनिंग के, टायर रिट्रेडिंग, डिजिटल थर्मामीटर को नए सिरे से व्हाइट कैटेगरी में शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में की जाए पैरवी, मंत्रियों से करेंगे मांग
फिरोजाबाद की गैस इकाइयों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीते साल ताज ट्रेपेजियम जोन में उद्योगों पर रोक लगा रखी है। ताज ट्रेपेजियम जोन अथॉरिटी की प्रार्थना पर सुप्रीम कोर्ट ने अनुमति देने से इन्कार कर दिया था। इस मामले में 11 नवंबर को सुनवाई होनी है। ऐसे में औद्योगिक संगठनों ने कहा है कि वह राज्य और केंद्र सरकार के मंत्रियों से मांग करेंगे कि वह दोनों सरकारों पर दबाव डालें कि वह ताज ट्रेपेजियम जोन में व्हाइट कैटेगरी के उद्योग लगाने की अनुमति देने के लिए कोर्ट में पैरवी करें और पक्ष रखें। सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ओर से हलफनामा दाखिल कराया जाए। पर्यावरण मंत्रालय ने नए सिरे से जो वर्गीकरण किया है, उसका फायदा तभी मिल पाएगा, जब कोर्ट की अनुमति मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट में पैरवी जरूरी
पर्यावरण मंत्रालय ने 50 से ज्यादा उद्योगों को व्हाइट कैटेगरी का हिस्सा नई सूची में बनाया है, लेकिन इसका फायदा दिलाने के लिए राज्य और केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करनी चाहिए। छह जिलों के उद्योगों की किस्मत जुड़ी हुई है वह हमारा रुख रखें। -संजय गोयल, अध्यक्ष, नेशनल चैंबर
उद्योग लगे और मिले रोजगार
व्हाइट कैटेगरी लिस्ट में 86 उद्योग हों या इससे ज्यादा, लेकिन इसका फायदा तो मिल ही नहीं पाएगा। जनप्रतिनिधियों से मांग है कि वह आगरा और पूरे टीटीजेड का दर्द समझते हुए कोर्ट में पैरवी कराने के प्रयास करें। कोर्ट से अनुमति के बाद यहां उद्योग लगे और युवाओं को रोजगार मिल सके। -मनीष अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष, नेशनल चैंबर