आगरा में आरटीओ के प्रवर्तन दल ने 25 दिसंबर को इटावा जा रहीं दो बसों को खंदौली के पास पकड़ लिया। दोनों बसों में महिलाओं और बच्चों के साथ 52 सवारियां थीं। बस मालिकों की लापरवाही का खामियाजा सवारियों को भुगतना पड़ा।
सीज बसों में भीषण सर्दी में बच्चे और महिलाओं समेत सवारियां 30 घंटे तक कैद रहीं। बृहस्पतिवार दोपहर को सवारियों के हंगामा करने पर आरटीओ ने एक बस को जुर्माना भरवाने के बाद छोड़ा।
आरटीओ के प्रवर्तन दल की पीटीओ प्रीति पांडेय ने बुधवार की सुबह 11 बजे पीछा करके खंदौली में दो प्राइवेट बस (यूपी 75 ए-3313) व (एमपी 07 पी-8777) को पकड़ा। एक बस में 25 व दूसरी में 27 सवारियां थीं।
पूरी रात बस में ठिठुरती रहीं सवारियां
बस चालक संतोष ने बताया कि दोनों बसों को सिद्धार्थ नगर जाना था, लेकिन आरटीओ ने सीज कर दिया। एक बस पर 24 हजार व दूसरी पर 28500 रुपये का जुर्माना किया गया। आरटीओ ने बताया कि बस चालक नशे में था। कागजात पूरे नहीं थे।
इसके बाद दोनों बसों को टीपी नगर पुलिस चौकी के सामने खड़ा कर दिया गया। पूरी रात दोनों बसों में सवार महिलाएं और बच्चे सर्दी में ठिठुरते रहे। उनके पास दूसरी बस में जाने के लिए किराया नहीं था। चालान दूसरे दिन जमा कराने को कह दिया गया।
बस मालिक के पहुंचने पर बृहस्पतिवार को दिन में भी प्रवर्तन पटल पर क्लर्क जुर्माना जमा करने को तैयार नहीं था। उधर, सर्दी में सवारियों का बुरा हाल हो रहा था। खाने पीने की दिक्कत भी खड़ी हो गई।
इस पर महिलाओं और बच्चों ने आरटीओ में पहुंचकर हंगामा किया। उनका कहना था कि एक बस तो चालान करके छोड़ दें। इसके बाद आरटीओ प्रवर्तन ने एक बस का चालान जमा कराकर सवारियों को उसी बस से रवाना किया।
रोडवेज बस में जाने को तैयार नहीं थी सवारियां: आरटीओ
सवाल: बसों को सीज किया गया तो उनमें सवारियों को दूसरी बस से क्यों नहीं भेजा गया?
जवाब: सवारियों के लिए दूसरी रोडवेज बस मंगवाई थी, लेकिन सवारियां उसमें जाने को तैयार नहीं हुईं।
सवाल: बच्चे, विकलांग व महिलाएं बसों में सवार थे, इनके लिए तो इंतजाम किया जा सकता था?
जवाब: बस का चालक नशे में था, कागजात नहीं थे। छुट्टी का दिन था। बृहस्पतिवार को एक बस से सवारियों को भेज दिया गया।
- अनिल कुमार, आरटीओ प्रवर्तन