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केंद्रीय कारागार में फंदे से लटका मिला बंदी का शव, इस जुर्म में काट रहा था उम्रकैद की सजा

Fri, 27 Dec 2019 12:30 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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केंद्रीय कारागार आगरा - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के केंद्रीय कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अलीगढ़ के बंदी आलोक गुप्ता का शव बुधवार रात को जेल की तन्हाई बैरक में फांसी पर लटका मिला। जेल प्रशासन के मुताबिक, बंदी मानसिक रूप से बीमार था। 
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उसका इलाज चल रहा था। उसने बैरक की कोठरी में कपड़े टांगने की खूंटी पर जूते के फीते से फांसी का फंदा बनाकर आत्महत्या की है। घटना की जानकारी पर परिजन आ गए। उन्होंने किसी तरह का आरोप नहीं लगाया। 

वैमनपुर, थाना अतरौली, अलीगढ़ निवासी आलोक गुप्ता (42) पुत्र अशोक कुमार गुप्ता को हत्या के मामले में वर्ष 2012 में आजीवन कारावास की सजा हुई थी। जुलाई 2015 में उसे केंद्रीय कारागार में शिफ्ट किया गया था। 
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मानसिक रूप से बीमार था बंदी

जेलर शिव प्रताप मिश्रा के मुताबिक, बंदी मानसिक रूप से बीमार था। इस कारण चार साल से इलाज चल रहा था। उसे रोजाना दवा दी जाती थी। बंदी को जेल की तन्हाई बैरक की कोठरी में रखा गया था। बुधवार रात को खाना खाने के बाद सभी बंदियों की गिनती हुई। इसके बाद सभी को बैरक में कर दिया गया। 

रात तकरीबन 12 बजे ड्यूटी पर तैनात बंदीरक्षक ने बंदी को कपड़े टांगने की खूंटी पर फांसी पर लटका देखा। सूचना पर अधिकारी पहुंच गए। बंदी जूते के फीते से बने फांसी के फंदे पर लटका हुआ था। जेल कर्मियों ने उसके शव को उतारा। 

तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। घटना की जानकारी पर बृहस्पतिवार सुबह बंदी के परिजन भी आ गए। वह पोस्टमार्टम के बाद शव लेकर गए। 

पंचायत में ससुर की गोली मारकर की थी हत्या

छोटे भाई अंशुल गुप्ता ने बताया कि आलोक की शादी वर्ष 2001 में धनौरा मंडी निवासी मुक्ति से हुई थी। शादी के तीन साल बाद आलोक का पत्नी से विवाद होने लगा। मुक्ति मायके चली गई। 2006 में परिवार के लोगों ने समझौते के लिए पंचायत बुलाई। 

पंचायत में विवाद होने पर आलोक ने अपने ससुर नंदकिशोर की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में आलोक, अंशुल और उनकी मां सरोज के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। कोर्ट ने तीनों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई थी। हालांकि अंशुल और सरोज जमानत पर छूट गए थे। 

मगर, आलोक को जमानत नहीं मिल सकी थी। वह बार-बार परिवार के लोगों से जमानत के लिए कहता था। जमानत न हो पाने की वजह से वह तनाव में आ गया था। इस कारण उसका इलाज चल रहा था। दो महीने पहले अंशुल भाई से मिलकर गया था। बृहस्पतिवार तड़के जेल से आलोक की मौत की सूचना मिली। 
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जेल में पहले भी बंद कर चुके हैं आत्महत्या 

केंद्रीय और जिला कारागार में बंदी पहले भी आत्महत्या कर चुके हैं। कई बार जेलकर्मियों की लापरवाही भी सामने आ चुकी है। जुलाई 2018 में केंद्रीय कारागार में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी अशोक (49) का शव जेल अस्पताल के शौचालय में फ्लश से फांसी पर लटका मिला था। 

सितंबर में शहीद नगर की एकता कॉलोनी में नकली नोटों का कारखाना चलाने के आरोप में गिरफ्तार पांच युवकों में से एक ओमकार झा (22) ने जिला कारागार में आत्महत्या कर ली थी। शव जेल अस्पताल के पीछे पेड़ से लटका मिला था। उसने गमछे से फांसी का फंदा बनाया था। 

पांच दिसंबर को जिला कारागार में चोरी के आरोप में निरुद्ध बल्देव (45) ने आत्महत्या कर ली थी। बंदी का शव शौचालय के छज्जे से फांसी पर लटका मिला था। बंदियों के आत्महत्या के मामले में जेल कर्मियों की लापरवाही सामने आ चुकी है। 
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