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सुरक्षित नहीं नौनिहालों का सफर: आगरा आरटीओ से फिटनेस ओके, पर जांच में अनफिट पाए गए 91 स्कूली वाहन, जांच के आदेश

Sun, 08 May 2022 12:12 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

आरटीओ से जिन स्कूली वाहनों को फिटनेस का प्रमाणपत्र दिया गया था, उन वाहनों की जब चेकिंग अभियान के दौरान जांच की गई, तो अधिकारी भी हैरान रह गए। 91 स्कूल वाहन ऐसे मिले, जिनकी हालत बेहद खतरनाक मिली।
 
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बिना साइड मिरर के जाती स्कूल वैन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा में स्कूली वाहनों में आपके नौनिहालों का सफर सुरक्षित नहीं है। आरटीओ से फिटनेस का प्रमाणपत्र लेकर सड़कों पर दौड़ रहीं 91 स्कूली बसें खतरनाक पाई गईं हैं। प्रवर्तन अधिकारी ने चेकिंग के दौरान इन गाड़ियों को अनफिट पाते हुए कार्रवाई की। इस पर आरटीओ ने संभागीय प्राविधिक निरीक्षकों से जवाब तलब किया है। 
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कोरोना संक्रमण के दौरान मार्च 2020 से ही गाड़ियों की फिटनेस की छूट देने के बाद जनवरी 2022 में आरटीओ से 1178 स्कूली वाहनों को फिटनेस कराने के लिए नोटिस भेजे थे। इसके बाद भी 500 से अधिक स्कूली बसों की फिटनेस नहीं हो सकी है। बड़ा खतरा उन स्कूली वाहनों से है, जिन्हें संभागीय परिवहन विभाग ने फिटनेस का प्रमाणपत्र तो जारी कर दिया मगर वह फिटनेस के मानक ही पूरे नहीं कर पा रहे हैं।
 

108 वाहनों की हुई जांच

एआरटीओ (प्रवर्तन) वंदना सिंह ने 22 से 28 अप्रैल तक चलाए गए अभियान के दौरान 108 स्कूली वाहनों की जांच की। इनमें 90 फीसदी बसें शामिल थीं। इन गाड़ियों में 91 ऐसी निकलीं, जिनकी फिटनेस आरटीओ से करवाई जा चुकी थी, लेकिन वह अनफिट थीं। किसी में खिड़कियों पर लोहे की रॉड नहीं थीं, किसी का साइड मिरर तो किसी में कुछ और गड़बड़ी मिली। एआरटीओ ने आरटीओ को फिटनेस के बाद भी खटारा पाईं गईं इन गाड़ियों की सूची स्कूलों की लिस्ट के साथ भेजी है। इस पर एआरटीओ प्रशासन अनिल कुमार सिंह ने संभागीय निरीक्षकों से जवाब-तलब किया है। वाहन-4 साफ्टवेयर के अनुसार ज्यादातर की फिटनेस हो चुकी है। 

फिटनेस के बाद एप पर डाला जाता है ब्योरा

वाहनों की फिटनेस अब एप के माध्यम से हो रही है। इसमें वाहन स्वामी को वाहन लेकर आना होता है। फिटनेस के दौरान साइड मिरर, स्पीड गवर्नर, मेडिकल किट समेत जरूरी उपकरणों को देखा जाता है, जो कमी होती हैं, उन्हें दूर कराया जाता है। इसके बाद गाड़ी के विभिन्न एंगल से फोटो परिवहन विभाग के एप पर अपलोड किए जाते हैं। इसके बाद वाहन 4 साफ्टवेयर पर गाड़ी के फिटनेस का प्रमाणपत्र लेकर दिया जाता है। इसके बाद भी अभी तक गाड़ियों की फिटनेस मशीनों के द्वारा नहीं होती है। आरआई जो खामियां बताते हैं, वह दूर करने के बाद फिटनेस पास की जाती है।  

फिटनेस के लिए गाड़ियों की आयु

आठ साल तक पुरानी गाड़ी की फिटनेस: प्रति दो साल
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आठ साल से ज्यादा पुरानी गाड़ी: हर एक साल 
इलेक्ट्रिक गाड़ी की फिटनेस: एक साल 

विशेषज्ञ बोले- गाड़ी खड़े-खड़े भी हो जाती हैं खराब

संक्रमण के कारण विद्यालय तकरीबन दो साल तक लगातार बंद रहे। इस कारण अधिकांश गाड़ियां फिटनेस कराने के बाद खड़ी रहीं। लगातार खड़े रहने से भी गाड़ियों में खामी आ जाती है। टूट-फूट हो सकती है, जिसकी मरम्मत नहीं कराई गई होगी। ऐसे वह प्रमाणपत्र के बाद भी अनफिट मानी जाएंगी। - राजेश कुमार, सेवानिवृत्त परिवहन अधिकारी
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इन विद्यालयों की गाड़ियां स्वस्थता जांच में अनफिट पाई गईं।

 

स्कूल का नाम       वाहनों की संख्या       फिट         अनफिट
आगरा पब्लिक स्कूल   10 08 02
बालमुकुंद रामचंद बाजारी 04   04
दिल्ली पब्लिक स्कूल 70 06 64
जीडी गोयनका स्कूल 21 02 19
चित्रांश सेवा समिति 01   01
डीएलए प्रोजेक्ट आरबीएस कालेज 01 01  
 

मामले की जांच की जा रही

फिटनेस प्रमाणपत्र देने के बाद भी अनफिट पाई गईं गाड़ियों के मामले की जांच की जा रही है। आरआई से भी जवाब तलब किया गया है। इसमें कई बार मरम्मत नहीं कराने के कारण समस्या आती है। स्कूल संचालकों से कहा गया है कि वह गाड़ियां दुरुस्त कराने के बाद ही सड़क पर भेजें। -अनिल कुमार सिंह, एआरटीओ (प्रशासन)
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