आगरा की सड़कों को गड्ढा-मुक्त करने के लिए नगर निगम ने डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर रोड डॉक्टर नाम की सड़क के गड्ढे भरने वाली मशीन खरीदी थी। सात महीने से यह मशीन नगर निगम परिसर में खड़ी है। मशीन पर धूल जमा हो चुकी है, जबकि शहर में 400 किमी. से ज्यादा लंबी सड़कों पर गड्ढों की भरमार है। जर्जर सड़कों के कारण आए दिन लोग गिरकर घायल हो रहे हैं।
आगरा नगर निगम क्षेत्र में आवास विकास, ताजगंज, फतेहाबाद रोड, बल्केश्वर, ट्रांसयमुना, ताजनगरी, शाहगंज, जयपुर हाउस, दयालबाग, न्यू आगरा, लॉयर्स कॉलोनी, अवधपुरी आदि में गड्ढों की भरमार है। तत्काल गड्ढों को भरने की जरूरत है।
नगर निगम के पास रोड डॉक्टर नाम की मशीन है लेकिन वही बीमार है। रेट बढ़ाने के इंतजार में मशीन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। बीते साल मेयर हेमलता दिवाकर ने इंफ्रारेड रिसाइकिलिंग पॉट होल्स रोड रिपेयरिंग मोबाइल मशीन का उद्घाटन किया था। तब 6.50 करोड़ रुपये का बजट इस मशीन के लिए दिया गया था।
1473 रुपये में भरा जाना था एक वर्गमीटर चौड़ा गड्ढा
यह मशीन सड़क के मटेरियल का दोबारा उपयोग कर मौजूदा सतह के समतल एक से दो वर्ग मीटर चौड़े गड्ढे आसानी से भर सकती है। ट्रक में ही इसका पूरा सामान रहता है। बीते साल 36 सड़कों पर इसका उपयोग किया गया लेकिन इस साल रेट बढ़ाने के लिए इस मशीन का उपयोग बंद कर दिया गया। दरअसल, 1473 रुपये प्रति वर्ग मीटर का भुगतान नगर निगम ठेकेदार को कर रहा था लेकिन ठेकेदार ने रेट बढ़ाने की मांग की। इसके कारण मशीन का इस्तेमाल बंद हो गया। अब निगम 1950 रुपये देने पर सहमत है। दोबारा रेट तय होने के बाद ही यह मशीन चलेगी।
पार्षद शरद चौहान ने बताया कि शहर में पहली बार इतने ज्यादा गड्ढे देखे हैं। मई-जून में निगम ने गड्ढे नहीं भरे, इसलिए इस बार बारिश में यह दुर्दशा हो रही है। करोड़ों रुपये की मशीनें बंद पड़ी है। उसका इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
पार्षद बंटी माहौर का कहना है कि केवल मशीन खरीदने पर अधिकारियों का जोर है। कमीशन लेकर मशीनें वर्कशॉप में खड़ी कर देते हैं। मशीन खराब है तो कर्मचारी लगाकर गड्ढे भरवाएं। जनता परेशान है।
दोबारा तय होगी दर
नगर निगम के प्रभारी मुख्य अभियंता अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि ईरान-अमेरिका युद्ध के कारण बिटुमिन के रेट बढ़ गए हैं। ऐसे में लागत का दोबारा निर्धारण होना है। पीडब्ल्यूडी से नए रेट आने के बाद निगम उसे लागू करेगा।