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डकैती का मामला: वादी ने बदल दिए बयान, 33 साल बाद बरी करने के आदेश; जानें पूरा प्रकरण

Thu, 29 Jun 2023 03:22 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, आगरा

सार

स्पेशल जज डकैती प्रभावित क्षेत्र महेंद्र कुमार प्रथम ने पीड़ित के बयान बदलने पर बल्केश्वर के भगवान नगर निवासी गुड्डू, कमला नगर निवासी सुरेश और कटरा वजीर खां निवासी विनोद को 33 साल 6 महीने बाद बरी करने का आदेश दिया।
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court new - फोटो : istock
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विस्तार
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आगरा के थाना एत्माद्दौला क्षेत्र में मदद के बहाने एक शख्स को नशीला पदार्थ खिलाकर युवक 20 हजार रुपये लेकर भाग गया। दूसरे दिन दरोगा दो सिपाही व अन्य लोगों के साथ पीड़ित के घर पहुंचे। परिजन को डराकर घर में रखी नगदी व गहने लूट ले गए। कोर्ट में इस पर वाद दायर किया गया। स्पेशल जज डकैती प्रभावित क्षेत्र महेंद्र कुमार प्रथम ने पीड़ित के बयान बदलने पर बल्केश्वर के भगवान नगर निवासी गुड्डू, कमला नगर निवासी सुरेश और कटरा वजीर खां निवासी विनोद को 33 साल 6 महीने बाद बरी करने का आदेश किया।
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ये है मामला 

बल्केश्वर निवासी रामसेवक ने 33 साल 6 महीने पहले कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत किया था। बताया था कि 30 मार्च 1990 को बैंक में ड्राफ्ट जमा करके 20 हजार रुपये निकाले थे। दोपहर करीब 12 बजे लौटते समय रास्ते में कटरा वजीर खां निवासी रामेश्वर मिला। उसने हीरोपुक पर बैठा लिया। रामबाग चौराहे पर पान खिलाया। पान खाने के बाद जवाहर पुल पर पहुंचते-पहुंचते वह बेहोश हो गए। होश आया तो रामेश्वर रुपयों का थैला लेकर गायब हो चुका था।
 

पड़ोसियों ने देखी थी वारदात 

31 मार्च 1990 को रात 11 बजे दरोगा रामनाथ वर्मा अपने साथ दो सिपाही और कॉलोनाइजर मुन्ना लाल, गुड्डू, सुरेश और विनोद के साथ घर पर आए। आते ही गालियां देना शुरू कर दिया। विरोध करने पर कहा कि हम पुलिस वाले हैं, घर की तलाशी लेनी है। घर में रखे जेवरात, नगदी और किसान विकास पत्र आदि लूट ले गए। आरोपियों को घर का सामान ले जाते पड़ोसियों ने भी देखा था।
 
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छह लोगों को किया गया था तलब 

इधर, आरोपियों की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर मेहताब सिंह ने बताया कि कोर्ट ने दरोगा रामनाथ वर्मा सहित छह लोगों को तलब कर केस की सुनवाई की गई। बाद में दरोगा और मुन्नालाल की मौत हो गई। रामेश्वर की पत्रावली अलग कर दी गई। रामेश्वर के फरार होने की वजह से उसके खिलाफ कुर्की वारंट जारी हुए। अब सुनवाई में कोर्ट में वादी अपने बयान से मुकर गया। कहा कि विनोद, गुड्डू और सुरेश ने घर पर कोई लूटपाट नहीं की थी। रुपयों का भी भुगतान मुन्नालाल ने कर दिया था।अभियोजन की तरफ से वादी के पहले बयान को सुनाया गया तो वादी ने कहा कि मैंने कुछ नहीं लिखवाया था। वकील साहब ने समझाया तो लिख दिया। कोर्ट ने वादी के बयान में विरोधाभास को देखते हुए आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए बरी कर दिया।
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