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Agra: फ्लैट में मिला रिटायर्ड इंजीनियर का शव, दरवाजा नहीं खुलने पर पड़ोसियों ने बुलाई पुलिस; अकेले रहते थे

Sun, 01 Feb 2026 01:39 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

फ्लैट से कोई आवाज नहीं आने पर लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम पर सूचना दी। शास्त्रीपुरम पुलिस चौकी प्रभारी फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस ने फ्लैट का लॉक खुलवाकर अंदर प्रवेश किया तो अंदर कमरे में शैलेंद्र बिस्तर पर मृत अवस्था में पड़े मिले।
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जांच में जुटी पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आगरा के सिकंदरा थाना के शास्त्रीपुरम क्षेत्र में रिटायर्ड इंजीनियर शैलेंद्र कुमार का शव फ्लैट के अंदर बेड पर पड़ा मिला। शुक्रवार से फ्लैट का दरवाजा नहीं खुलने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी थी। पुलिस ने फ्लैट खुलवाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक के परिवार में सिर्फ एक गोद लिया बेटा है,जो कि पुणे में सैन्य सेवा में तैनात है।
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शिवम एलिगेंट अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 505 में रिटायर्ड इंजीनियर शैलेंद्र कुमार (78) रहते थे। पड़ोसियों के अनुसार वह अकेले रहते थे और किसी से ज्यादा बात नहीं करते थे। अपनी दवाएं और भोजन समेत जरूरत का सामान ऑनलाइन मंगाते थे। शुक्रवार से शनिवार दोपहर 12 बजे तक भी फ्लैट से कोई आवाज नहीं आने पर लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम पर सूचना दी। शास्त्रीपुरम पुलिस चौकी प्रभारी फोर्स के साथ पहुंचे। पुलिस ने फ्लैट का लॉक खुलवाकर अंदर प्रवेश किया तो अंदर कमरे में शैलेंद्र बिस्तर पर मृत अवस्था में पड़े मिले। हालात देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि तबीयत खराब हाेने के कारण वह बिस्तर से उठ नहीं पाए।

अंतिम समय में अकेलेपन से जूझते रहे
पुलिस पूछताछ में पड़ोसियों ने बताया कि शैलेंद्र का एक गोद लिया बेटा ही था,जो पुणे में सैन्यकर्मी है। कभी -कभी उसे लोगों ने यहां आते देखा था। उनकी लोहामंडी में रिश्तेदारी है। शैलेंद्र अकेलेपन से काफी समय से परेशान थे और इसी कारण वह किसी से अधिक बात भी नहीं करते थे। पुलिस ने रिश्तेदारों को सूचना दी और बेटे से संपर्क किया है। पुलिस के अनुसार बेटे ने देर रात तक आगरा पहुंचने के लिए कहा है।
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इससे अच्छा वृद्धाश्रम में रहे एकाकी बुजुर्ग
परिवार परामर्श केंद्र के काउंसलर और समाजसेवी पूर्व सैनिक सतीश खिरवार बताते है कि आज की भागदौड़ की जिंदगी में लोग बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाकर नौकरी के लिए खुद से दूर भेज देते हैं। वृद्धावस्था में वह अकेले रह जाते हैं। ऐसे बुजुर्गों के लिए प्रशासन को आश्रमों की सहायता लेने की आवश्यकता है। एकाकी जीवन जीने वाले लोगों की सूची बनाकर उन्हें समय-समय पर देखना चाहिए।

शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा। एकाकी बुजुर्गों के लिए थाना स्तर पर बीट सिपाहियों को निर्देशित किया जाएगा। समय-समय पर उन लोगों की समस्याओं की जानकारी ली जाएगी। -सय्यद अली अब्बास, डीसीपी सिटी

 
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