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जीवन को साथ लेने की कला ही धर्म

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मैनपुरी। श्री अजितनाथ जिनालय कटरा में बुधवार को प्रतिज्ञा श्री, परीक्षा श्री, प्रेक्षा श्री के सानिध्य में शांति धारा एवं अभिषेक पूजन कराया गया। पूजन के बाद प्रतिज्ञा श्री ने प्रवचन देते हुए कहा कि जीवन को साथ लेने की कला में संलग्न हो जाना ही धर्म है। धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है।
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उन्होंने कहा कि जीवन को साध लेने की यथार्थ साधना का नाम ही धर्म है। 48 दिवसीय महा भक्तांबर विधान के पूर्ण होने के पश्चात पंडित कमल कुमार जैन का पगड़ी पहनाकर वस्त्र भेंट कर पुष्य प्रमुख चातुर्मास कमेटी के पदाधिकारियों द्वारा सम्मान किया गया। सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों को सम्मानित किया गया। श्रवण भारती द्वारा जैन समाज के मेधावी छात्र-छात्राओं को उपहार और प्रमाणपत्र प्रदान किए। कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रमुख सागर युवा मंच, सचि महिला मंडल मैनपुरी, पुष्प प्रमुख चातुर्मास समिति का सहयोग रहा।
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भक्तामर स्त्रोत संजीवनी बूटी की तरह
करहल। जैन मंदिर नसियाजी में बुधवार से 40 दिवसीय भक्तामर स्त्रोत का शिविर प्रारंभ हुआ। आचार्य विहसंत सागर महाराज ने कहा कि भक्तामर स्त्रोत जैन धर्म की संजीवनी बूटी की तरह है। इसके पाठ से आधि व्याधि एवं कष्टों का निवारण होता है। जो भक्त भगवान की सच्ची श्रद्धा से भक्ति करता है वही अमर हो जाता है। इस मौके पर रीना जैन, प्राची जैन, नीरजा, मुस्कान, सुजाता, लवली मुजबार, राकेश सिंघई, आलोक बकेवरिया, मणि जैन मौजूद रहे। संवाद
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