मुगलों की राजधानी कहूं या फिर कहूं सफेद संगमर से बने ताजमहल की नगरी। आजाद भारत में पर्यटन की राजधानी आगरा यूं तो न जाने कितने इतिहास को समेटे हुए हैं। शाहजहां ने जहां अपनी बेगम नूरजहां की याद में ताजमहल बनवाया तो इसी से प्रभावित होकर डच नागरिक की पत्नी ने अपने पति की याद में लाल ताजमहल का निर्माण कराया। यहां दो नहीं बल्कि 400 से अधिक ईसाई समुदाय की कब्रें हैं और आज भी ईसाई समुदाय द्वारा यहां अपने परिजन का अंतिम संस्कार किया जाता है।
1803 में बने इस स्मारक को बनाने में एक लाख रुपये का खर्चा आया था। लाल ताजमहल आज भी अपनी शानो शौकत को दिखा रहा है। शहर की लाइफ लाइन कही जाने वाली सड़क एमजी रोड, भगवान टॉकीज पर यह मौजूद है। इस स्मारक की इमारत ताजमहल की तरह ही लगती है, लेकिन लाल पत्थरों की वजह से इसे लाल ताजमहल कहा जाता है। इसका आकार भी ताजमहल से काफी कम है। आगरा के सबसे पुराने कब्रिस्तान के रूप में मशहूर लाल ताजमहल दरअसल सर कर्नल जॉन विलियम हेसिंग का मकबरा है, जो उनकी पत्नी वेनी ने उनकी याद में बनवाया था। कहा जाता है पति-पत्नी ताजमहल को देखकर इतना प्रभावित हुए थे कि दोनों ने एक दूसरे से वायदा किया था कि मरने के बाद जीवित पति या पत्नी दोनों में एक इसका निर्माण कराएगा।