कासगंज में गन्ना की फसल का निरीक्षण करते जिला गन्ना अधिकारी ।
कासगंज। मौसम का उतार चढ़ाव गन्ने की फसल के लिए खतरा बन रहा है। उसमें लाल सड़न रोग लगने लगा है। गन्ना विभाग ने फसलों को रोग से बचाने के उद्देश्य से किसानों के लिए सलाह जारी की है। जिला कृषि अधिकारी ने फसलों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। जिला गन्ना अधिकारी ओम प्रकाश ने बताया कि उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद, शाहजहांपुर ने कुछ क्षेत्रों में गन्ना किस्म को 0238 की पत्तियों पर लाल सड़न रोग के लक्षण दिखाई देने के बाद सलाह जारी की है। लाल सड़न में पत्तियों के निचले भाग से ऊपर की तरफ मध्य सिरा पर लाल रंग के धब्बे, रूद्राक्ष, मोतियों की माला जैसे प्रदर्शित होते हैं। कंडुआ में पौधों की पत्तियां छोटी, नुकीली तथा पंखे के आकार की हो जाती हैं। उकठा (विल्ट) व जड़ बेधक कीट का गर्मियों में कम आर्द्रता, मृदा में नमी का अभाव, दिन में उच्च तापमान व सूखे जैसी प्रतिकूल स्थिति में प्रकोप अधिक होता है। गुलाबी चिकटा (मिलीबग) का मादा कीट गुलाबी रंग की तथा गोल या चपटे आकार की होती है। यह कीट समुदाय में गन्ने की गांठों पर पाए जाते हैं।
यह करें उपाय: -लाल सडन रोग -प्रभावित गन्ने के पौध को जड़ से निकालकर नष्ट कर दें। गड्ढे में 0.2 प्रतिशत थायोफेनेटमेथिल 70 डब्लूपी अथवा एजॉक्सीस्ट्रोबिन 18.2 + डाई फेनोकोनाजोल 11.4 एससी के घोल की ड्रेचिंग करें।
- कंडुआ रोग- गन्ने के टुकड़ों को प्रोपिकोनाजोल 25 ईसी. या कार्बेन्डाजिम 50 डब्लूपीके 0.1 प्रतिशत घोल में बीज को 10 मिनट तक उपचारित करें।उकठा रोग- मृदा में बोरेक्स 15 कि.ग्रा. प्रति हेक्टेयर डालें। बोरान तथा मैगनीज (40 पीपीएम) घोल के छिड़काव से प्रभावी नियंत्रण होता है।
- जड़ बेधक रोग- ट्राइकोग्रामा काइलोनिस के 50,000 वयस्क प्रति हेक्टेयर की दर से 10 दिन के अंतराल पर माह जून के अंतिम सप्ताह से माह सितंबर तक प्रयोग जा सकती है।
- गुलाबी चिकटा रोग- गन्ने की लीफशीथ को हटाने के बाद इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 200 मिली अथवा डाइमेथोयेट 30 प्रतिशत ईसी की 1.25 लीटर को 625 लीटर पानी में अथवा मोनोक्रोटोफॉस 36 एसएल की 1500 मिली प्रति हेक्टेयर की दर से 500-1000 लीटर पानी के साथ छिड़काव करें।