किसानों का दर्द भी नहीं आया प्रशासन को कभी नजर
राजनीति से इतर भाजपा शासन में किसानों का दर्द भी प्रशासन को कभी नजर नहीं आया। चाहे बेसहारा गोवंश ने किसानों के खेत बर्बाद कर दिए हों या फिर खेतों की बुवाई के लिए डीएपी की जरूरत हो। हर बार किसानों को केवल परेशानी ही मिली। शासन भले ही गोशालाओं का संचालन कर रहा है, लेकिन प्रशासन बेसहारा गोवंश को गोशाला तक नहीं पहुंचा सका। डीएपी के लिए 1350 रुपये प्रति बोरी के स्थान पर 1600 रुपये वसूला गया। ऐसे में किसानों को जब लगा कि सरकार ये चुनाव लड़ रही है तो किसानों जवाब दिया। किसानों ने उपचुनाव में ये संकेत दे दिए कि अगर उनकी समस्याओं का निदान नहीं होगा तो वे भी वोट की चोट करेंगे।
विकास के नाम पर मिला इंतजार
मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में विकास भी कहीं न कहीं लोगों के बीच मुद्दा बना। सपा जहां अपने विकास कार्यों को गिनाती रही तो वहीं भाजपा नेता मुद्दे से भटकाने का काम करते रहे। दरअसल मैनपुरी में सपा सरकार ने फोरलेन से लेकर, राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज, राजकीय पॉलीटेक्निक कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज, सैनिक स्कूल, बस स्टैंड, सौ शैया अस्पताल से लेकर अन्य विकास कार्य गिनाए। लेकिन भाजपा के पास साढ़े पांच साल बाद भी मैनपुरी में विकास का एक उदाहरण नहीं नजर आया। ऐसे में जनता ने विकास के नाम पर सपा को वोट दिया और भाजपा को हार से संतोष करना पड़ा।