टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन रतन टाटा का बुधवार की देर रात मुंबई में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार मुबई में हुआ। उनसे जुड़े कई किस्से हैं। ऐसा ही एक किस्सा अमर उजाला आर्काइव से है, जब रतन टाटा ने चेयरमैन और डायरेक्टर की रिटायरमेंट उम्र तय कर दी थी...
प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा ने टाटा समूह को रतन बनाने के लिए कंपनियों में मालिकाना हक जताने वालों को किनारे कर दिया था। उसके लिए उन्होंने रिटायरमेंट नीति लागू की। कंपनी के चेयरमैन और डायरेक्टर जैसे अहम पदों पर रिटायरमेंट की उम्र 65 और 75 कर दी। हालांकि इस नीति पर कुछ कंपनी बोर्डों ने असहमति जताई, लेकिन उन्होंने ऐसे लोगों को समूह से बाहर का रास्ता दिखाया या फिर मार्गदर्शन मंडल भेज दिया।
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अमर उजाला के अंक 22 अप्रैल, 1992 और 03 मई 1993 में प्रकाशित खबर के अनुसार, टाटा समूह ने अपनी कंपनियों के लिए चेयरमैन और कार्यकारी अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशकों की उम्र सीमा 75 तथा 65 तय की। यह फैसला मुंबई में समूह की बोर्ड मीटिंग में जेआरडी टाटा की मौजूदगी में रतन टाटा ने लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तत्कालीन विश्व की व्यावसायिक प्रबंध वाली कंपनियों में माैजूद व्यवस्था से इस समूह को नए शिखर पर ही ले जाया जा सकता है। यही वजह थी कि उन्होंने इस पाॅलिसी को अपने ग्रुप में लागू किया। उनका यह फैसला उस समय दूरगामी साबित हुआ जब उन्होंने नैनो से लेकर जेएलआर (जैगुआर लैंड रोवर) जैसे गाड़ी मार्केट में उतारकर अपनी अलग पहचान बनाई।
बाधाओं से जूझकर पाई सफलता
रतन टाटा के सामने कई कंपनियों के चेयरमैन और डायरेक्टर चुनाैती बनकर खड़े थे, वह उन्हें मालिक न मानकर प्रतिद्वंदी मानते थे। उन्होंने टाटा संस के चेयरमैन जेआरडी टाटा की ढीली नियंत्रण पद्धति के अपनाने के दाैरान 20-22 साल में स्वतंत्र हैसियत बना ली और कंपनियों को चेयरमैन या प्रबंध निदेशक की तरह नहीं, बल्कि मालिक की तरह चलाया। स्थिति यह हो गई कि इनमें कुछ के पास तो अपनी कंपनी के टाटा संस से भी ज्यादा शेयर हो गए। जिनमें टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक रूसी मोदी, टाटा टी व टाटा केमिकल्स के चेयरमैन दरबारी सेठ, वोल्टाज के चेयरमैन एएच टोबैको वाला और इंडियन होटल्स के अजित केरकर शामिल थे।
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...जब रूसी मोदी को किया बेदखल
रतन टाटा की रिटायरमेंट पॉलिसी ने सबसे पहले टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड के चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक रूसी मोदी शिकार बने। क्योंकि पाॅलिसी के लागू होने के एक साल बाद ही 1993 में रूसी मोदी 75 साल के हो गए। उन्हें टिस्को चेयरमैन पद से हटा दिया गया।