राम मंदिर आंदोलन में बाह नगर के संघ चालक जगदीश प्रसाद कसेरे की पत्नी उर्मिला देवी ने भी बढ़कर हिस्सा लिया था। रामशिला एकत्रीकरण के बाद राम ज्योति को आगरा से इटावा ले जाने का उत्तरदायित्व निभाया था। तब मुलायम सिंह मुख्यमंत्री थे। इटावा उनका गढ़ था। कोई भी राम ज्योति को इटावा तक पहुंचाने की चुनौती को स्वीकार नहीं कर रहा था। तब उर्मिला देवी ने आगरा से राम ज्योति को उठाया था।
उन्होंने शमसाबाद, धिमश्री, फतेहाबाद, पिनाहट, भदरौली, जरार, बाह होते हुए इसे इटावा पहुंचा दिया था। इस काम में बेटे अजय कसेरे बतौर चालक उनके साथी बने थे। इटावा से वापस लौटते समय उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया था।
उर्मिला देवी और उनके बेटे अजयकसेरे ने बताया कि मंदिर का सपना पूरा होने पर गर्व और गौरव का अहसास हो रहा है। अच्छा होता कि अयोध्या में इस पल का गवाह बनने का अवसर प्रदान किया जाता। मंदिर आंदोलन के दौरान एटा जेल में रहे बाह के विनोद जैन, जैतपुर के प्रवीन जैन, ब्रज मोहन तिवारी, जरार के विजय प्रधान, अमरीश गुप्ता ने बताया कि आंदोलन के दौरान मंदिर के बनने का जो सपना देखा था। उसके पूरे होने पर गर्व की अनुभूति हो रही है।