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आंवलखेड़ा में 11 अक्टूबर को राम बरात निकालने की अनुमति नहीं, इस तारीख पर बनी सहमति

Mon, 07 Oct 2019 11:55 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आंवलखेड़ा में बैठक करते विहिप और बजरंग दल के कार्यकर्ता - फोटो : अमर उजाला
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आगरा के आंवलखेड़ा में श्रीराम बरात निकाले जाने को लेकर गहराया विवाद थमता नजर आ रहा है। श्रीराम बरात 11 की बजाय 15 अक्टूबर को निकाले जाने को लेकर सहमति बन गई है। एक-दो दिन में इसके लिए अनुमति मिल सकती है। तभी औपचारिक रूप से इसकी घोषणा की जाएगी।
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पिछले दिनों प्रशासन ने आंवलखेड़ा में 11 अक्टूबर को श्रीराम बरात निकाले जाने की अनुमति को खारिज कर दिया था। इसके साथ ही तमाम लोगों को पाबंद कर भी कर दिया था। इसको लेकर विवाद गहरा गया था। विधायक रामप्रताप सिंह चौहान सहित विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि संगठनों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। 

अखिल भारत हिंदू महासभा ने तो निमंत्रण पत्र तक बांट दिए। कई दिनों की तनातनी के बाद अब इस मामले में प्रशासन और आयोजकों के बीच सुलह होती दिख रही है। बताया जा रहा है कि दोनों के बीच 15 अक्टूबर को श्रीराम बरात निकाले जाने को लेकर सहमति बन गई है। 
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भव्य रूप से निकाली जाएगी राम बरात

इस संबंध में रविवार को आंवलखेड़ा में विहिप, बजरंग दल की आयोजकों के साथ बैठक भी हुई। विहिप के प्रांत उपाध्यक्ष सुनील पाराशर ने बताया कि सभी की सहमति से आंवलखेड़ा में श्रीराम बरात भव्य रूप से निकाली जाएगी। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि प्रशासन के साथ सहमति बन गई है। 

उधर, भगवान श्री राम की बरात का आयोजन में तारीख के बदलाव पर भी लोगों ने रोष जताया है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन तारीख तय कर रहा है, तो आयोजन के खर्च आदि की जिम्मेदारी भी उठाए। आयोजन समिति ने राम बरात की तारीख 11 अक्तूबर तय की थी। पर, प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी। 

इतना ही नहीं आयोजन से जुड़े 60 लोगों को पाबंद भी कर दिया। उसके इस कदम पर लोगों ने विरोध जताना शुरू किया, तो अब प्रशासन 11 के बजाय 15 अक्तूबर को राम बरात निकालने देने को तैयार है। लोगों को पाबंद करने के बाद दूसरी तारीख को आयोजन की अनुमति दिए जाने से स्थानीय लोगों में गुस्सा है। 

लोगों का यह तक कहना है कि अगर प्रशासन तारीख तय कर सकता है तो पूरी राम बरात का खर्चा भी उठा सकता है। पिछले वर्ष राम बरात निकालने वाली समिति भारत संगम सेवा संस्थान के अध्यक्ष भूपेंद्र भारद्वाज ने कहा कि जिन 60 लोगों का पाबंद करने प्रशासन ने उनके सम्मान को ठेस पहुंचाई है। उनसे लिखित में माफी मांगी जानी चाहिए। 


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