मथुरा में सोमवार की शाम को करीब साढ़े चार बजे दीनदयाल धाम रेलवे स्टेशन पर बड़ा हादसा होने से बच गया। स्टेशन के पास खुले फाटक से भीड़ के बीच होकर राजधानी एक्सप्रेस गुजर गई। भीड़ का दबाव होने के कारण फाटक बंद नहीं हो पाया था।
ट्रेन को देख भगदड़ मच गई जिससे कई लोग चोटिल हुए हैं। सभी लोग दीनदयाल धाम में लगे मेले को देखकर लौट रहे थे। बता दें कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में उनके गांव नगला चंद्रभान में 18 सितंबर से मेला लग रहा है। सोमवार को मेले का अंतिम दिन था लिहाजा बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे।
शाम को करीब साढ़े चार बजे भारी भीड़ मेला देखने के बाद अपने घरों को लौट रही थी। जब यह भीड़ दीनदयाल धाम रेलवे स्टेशन के पास क्रासिंग पर पहुंची तो जाम लग गया। कहीं चार पहिया वाहन फंसे खड़े थे तो कहीं दोपहिया वाहनों की लाइन थी। भीड़ के कारण क्रासिंग का फाटक भी बंद नहीं हो पा रहा था।
दो सिपाही और हजारों की भीड़
आरपीएफ के सिपाहियों ने भीड़ को हटाने के काफी प्रयास किए लेकिन दो सिपाही होने के कारण भीड़ के आगे उनकी चल नहीं पाई। इसी दौरान दिल्ली की तरफ से राजधानी एक्सप्रेस आ गई। गेटमैन ने फाटक को बंद करने के प्रयास किए लेकिन बंद नहीं हुआ।
वहीं राजधानी एक्सप्रेस को देखकर भगदड़ मच गई। क्योंकि उस वक्त लाइनों पर भारी भीड़ थी लिहाजा लोग एक दूसरे को धक्का देकर क्रासिंग से बाहर की तरफ दौड़ पड़े। राजधानी एक्सप्रेस भी भीड़ के बीच से गुजर गई। सैकड़ों लोग ट्रेन की चपेट में आने से बचे।
स्टेशन डायरेक्टर एनपी सिंह का कहना है कि गेटमैन फाटक बंद कर रहा था लेकिन भीड़ के कारण फाटक बंद नहीं हो सका। आरपीएफ के सिपाही भी स्थिति को कंट्रोल कर रहे थे लेकिन भीड़ संभल नहीं पाई।
एक किलोमीटर दूर जाकर रुक गई ट्रेन
राजधानी एक्सप्रेस दीनदयाल धाम रेलवे स्टेशन से करीब एक किलोमीटर आगे जाकर रुकी। तीन मिनट तक ट्रेन खड़ी रही। रेलवे अफसरों का कहना है कि इंटरलाकिंग सिस्टम है। जब फाटक बंद नहीं होता सिग्नल रेड हो जाता है। रेड सिग्नल होने के कारण एक्सप्रेस आगे जाकर रुक गई थी।
हजारों की भीड़ भगवान भरोसे
अधिकारी तो दीनदयाल धाम में आने वाले मंत्रियों की सेवा में ही लगे रहे। जैसे ही धाम से मंत्री रवाना होते अधिकारी भी उनके साथ ही निकल आते थे। जनता का क्या होगा। सुरक्षा के क्या प्रबंध हैं इनकी बला से। डीएम और एसएसपी से लेकर पुलिस और प्रशासन के सभी बड़े अधिकारी पिछले कई रोज से दीनदयाल में लगे हुए थे। लेकिन इनकी ड्यूटी केवल मंत्रियों की सेवा तक ही सीमित रही।
ट्रैफिक कैसे गुजरेगा। भीड़ किस तरह कंट्रोल होगी। वहां चार पहिया वाहनों को रोका जाए। इस बारे में तो किसी का ध्यान गया ही नहीं। भीड़ को बस भगवान के भरोसे छोड़ दिया था अधिकारियों ने। ट्रैफिक को भी कहीं नहीं रोका जा रहा था। बस ट्रक के साथ ट्रैक्टर ट्राली भी भीड़ के बीच से गुजर रहे थे। 19 सितंबर को जब मुख्यमंत्री आए थे तब भी रास्ते में भगदड़ मच गई थी। कई बच्चे भी घायल हो गए थे। लेकिन उसके बाद भी अधिकारियों की नींद नहीं टूटी।