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उमसभरी गर्मी से मिली राहत, ताजनगरी में जमकर बरसे मानसून के काले बादल

Mon, 22 Jul 2019 12:13 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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बारिश के बीच दोपहिया वाहन पर महिलाएं - फोटो : अमर उजाला
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कुछ दिनों से उमसभरी गर्मी लोगों को बेहाल कर रही थी। लेकिन, रविवार शाम मानसून के काले बादल जमकर बरसे। हालांकि इस बार बारिश का हाल कुछ बदल गया है। शहर में रविवार पंद्रह मिनट की बारिश हुई।
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मानसून के बादल अब पूरे महीने नहीं, बल्कि टी-20 क्रिकेट मैच की तरह ताबड़तोड़ अंदाज में चंद दिनों में ही बरस कर पूरे महीने का कोटा पूरा कर रहे हैं। एक दशक में मानसून के ट्रेंड में यह बदलाव नजर आया है। आगरा में जुलाई के महीने में एक दशक पहले तक औसतन 10.4 दिन मानसूनी बादल बरसते रहे हैं, लेकिन एक दशक से अब यह औसत 5 तक आ गया है।

इस साल मानसून ने सात दिन देरी से आगरा में दस्तक दी। 26 जून की जगह 4 जुलाई को मानसून के बादल बरसे तो चंद घंटों में ही 123 मिमी की बारिश कर दी। इस महीने महज 5 दिन ही बादल बरसे हैं और जुलाई के महीने की औसत बारिश 201 मिमी को पार कर 230 मिमी से ज्यादा हो चुकी है।
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पिछले पांच सालों में जुलाई के महीने में 5 से सात दिन तक ही बारिश हुई है। पांच साल में 2016 और 2018 में जुलाई की बारिश ने औसत पूरा किया, लेकिन यह औसत महज 7 दिनों की बारिश में पूरा हो गया। 160 मिमी तक बारिश इन दोनों सालों में एक ही दिन में हो गई। इसके उलट पूर्व में मानसून में कई दिन ऐसे रहते थे, जब बादल छाए रहने के साथ रिमझिम बारिश भी लगातार कई दिनों तक होती रहती थी।

भूगर्भ जल स्तर में बढ़ावा
हाइड्रोलोजिस्ट धर्मवीर सिंह राठौर के मुताबिक तेजी से बारिश के कारण पानी नालों और नदियों में बहकर बर्बाद हो रहा है। धीमी रिमझिम बारिश से भूगर्भ जल स्तर में भी बढ़ोतरी होती है। खेतों में रिमझिम बारिश के जरिए खेत का पानी खेत में ही रहता है, यह भूजल स्तर को बढ़ाने में सबसे ज्यादा मददगार है। शहर में कच्चा स्थान कम होने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग न करने के कारण भूजल स्तर नहीं बढ़ पा रहा।

एके मिश्रा, मौसम विज्ञानी का कहना है कि कई वैज्ञानिक कारणों से मानसून में बारिश में बदलाव दिखाई दे रहा है। बारिश में एक दशक में अप्रत्याशित रूप से कभी कमी तो कभी बढ़ोतरी रही है। इसके कारकों पर अध्ययन चल रहे हैं।
 
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