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Agra: गधापाड़ा में सिटी फॉरेस्ट के विरोध में रेलवे, जवाब किया दाखिल...सुप्रीम कोर्ट में होनी है सुनवाई

Tue, 13 May 2025 09:24 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

रेल प्राधिकरण ने गधापाड़ा में सिटी फॉरेस्ट का विरोध किया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। रेलवे की ओर से जवाब दाखिल कर दिया गया है। 
 
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court new - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा के गधापाड़ा मालगोदाम की 90,304 वर्ग मीटर जमीन पर आवासीय योजना के लिए काटे गए पेड़ों के मामले में रेल भूमि विकास प्राधिकरण (आरएलडीए) ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है। रेल प्राधिकरण ने सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी की इस जमीन के 2.30 हेक्टेयर हिस्से पर सिटी फॉरेस्ट बनाने की सिफारिश का विरोध किया है। रेलवे ने इसे संरक्षित वन घोषित करने की सिफारिश पर आपत्ति जताई है।
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गधापाड़ा रेल मालगोदाम की 9.0304 हेक्टेयर जमीन पर काटे गए पेड़ों पर रेल भूमि विकास प्राधिकरण ने अपना रुख बदल लिया है। अब तक प्राधिकरण के अधिकारी सेंट्रल इंपावर्ड कमेटी और सुप्रीम कोर्ट में पेड़ों की कटाई होने से ही इंकार कर रहे थे, लेकिन अब कमेटी की आधी सिफारिशें मानने को तैयार हैं, लेकिन 9.0304 हेक्टेयर जमीन में से 2.30 हेक्टेयर जमीन पर सिटी फॉरेस्ट बनाने का विरोध किया है।

 

प्राधिकरण ने कोर्ट में दाखिल किए गए जवाब में कहा है कि पेड़ काटने के एवज में 1,150 पौधे प्रतिपूरक और 1,150 पौधे दंडात्मक प्रतिपूरक तहत लगा दिए जाएंगे, जिसका खर्च गणपति इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड और गणपति लीजिंग इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड का कंसोर्टियम उठाएगा, लेकिन आरएलडीए को सिटी फॉरेस्ट पर आपत्ति है। उत्तर प्रदेश संरक्षित वन नियमावली के तहत यह प्रावधान गलत है।

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टेंडर, लीज प्रक्रिया को पटरी से उतार देगा
प्राधिकरण ने कोर्ट में कहा है कि मालगोदाम की जमीन पर संरक्षित वन घोषित करने से टेंडर प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। यह व्यावसायिक रूप से व्यवहारिक नहीं है। रेलवे को इससे भारी वित्तीय झटका लगेगा। रेलवे के पट्टा प्रीमियम, राजस्व हिस्सेदारी और आय पर असर पड़ेगा, वहीं निवेशकों के विश्वास पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
 
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