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कागजों में 'खो' गई रेलवे की दो किलोमीटर जमीन, डीएम के आदेश पर ढूंढने में जुटे अफसर

Sun, 06 Sep 2020 01:50 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • आगरा-धौलपुर के मध्य ग्रामीणों ने रुकवाया रेलवे यार्ड की फेसिंग का कार्य
  • 1959 में रेलवे ने अधिग्रहित की जमीन अब राजस्व रिकॉर्ड में नहीं रेलवे के नाम दर्ज
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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आगरा-धौलपुर मध्य जाजऊ स्टेशन के पास 1316 से 1318 किमी तक दो किमी रेलवे की जमीन खो गई। कलक्ट्रेट में इसका रिकॉर्ड नहीं मिल रहा। उधर, ग्रामीणों ने जमीन को ग्राम सभा की बताते हुए रेलवे द्वारा कराए जा रहे तीसरी लाइन बिछाने और तार फेसिंग कार्य को बंद करा दिया है।

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आगरा रेल मंडल प्रबंधक कार्यालय ने आगरा-धौलपुर मार्ग पर खेरागढ़ तहसील क्षेत्र के सैंया मौजा स्थित जाजऊ रेलवे स्टेशन यार्ड में तार फेसिंग कार्य जुलाई में शुरू किया था। मध्य रेलवे के प्रधान कार्यालय मुंबई के मुताबिक जाजऊ में 1316 से 1318 किमी तक रेलवे का भूमि प्लान है। इसके लिए दो बार में भूमि अधिग्रहित की गई। 


पहली बार 18 मार्च 1912 और फिर पांच दिसंबर 1959 में। जुलाई में जब रेलवे ने स्टेशन यार्ड में तार फेसिंग शुरू की, तो ग्रामीणों ने विरोध किया। एडीएम प्रशासन से रेलवे द्वारा गलत भूमि पर फेसिंग कराने की शिकायत की। एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव की जांच में विवादित भूमि राजस्व रिकॉर्ड में रेलवे के नाम दर्ज नहीं मिली। 

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18 साल पहले हुआ था सत्यापन

रेलवे के मंडल इंजीनियर के मुताबिक वर्ष 2002 में 18 साल पहले आखिरी बार 1316 से 1318 किमी के भूमि प्लान को तत्कालीन तहसीलदार खेरागढ़ आरपी सिंह, राजस्व निरीक्षक सैंया क्षेत्र राम प्रकाश और क्षेत्रीय लेखपाल रमेश बाबू ने सत्यापित किया था। परंतु अब इसका खेरागढ़ तहसील और कलक्ट्रेट में रिकॉर्ड नहीं मिल रहा। विवादित भूमि का स्वामित्व भी बदल गया है।

रेलवे के पास भी नहीं हैं दस्तावेज

आगरा से धौलपुर तक क्षेत्र पहले मध्य रेलवे के झांसी मंडल में आता था। तब इसका मुख्यालय मुंबई वीटी में था। फिर नए जोन बन गए। अब यह क्षेत्र मध्य रेलवे मुख्यालय प्रयागराज में आता है। ऐसे में जिस भूमि को लेकर विवाद है उसके 1912 और 1959 में हुए अधिग्रहण का रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज रेलवे के पास नहीं मिल रहे। 

चाहिए 1959 से पूर्व स्थिति का सत्यापन

रेलवे को अब राजस्व विभाग से 1959 से पूर्व स्थिति का सत्यापित रिकॉर्ड चाहिए। जिलाधिकारी को भेजे पत्र में मंडल इंजीनियर ने जिले के राजस्व विभाग से अधिग्रहित भूमि के सत्यापन की मांग की है। सत्यापित प्रतिलिपियां जिले के 100 साल पुराने भूमि प्लान से उपलब्ध कराने के लिए कहा है। 

जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि जाजऊ में रेलवे की दो भूमि का विवाद है। रेलवे ने 100 साल पहले भूमि का अधिग्रहण किया था। रिकॉर्ड का दोबारा परीक्षण करा रहे हैं। एडीएम प्रशासन से जांच आख्या मांगी है। 
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