रेलवे के मंडल इंजीनियर के मुताबिक वर्ष 2002 में 18 साल पहले आखिरी बार 1316 से 1318 किमी के भूमि प्लान को तत्कालीन तहसीलदार खेरागढ़ आरपी सिंह, राजस्व निरीक्षक सैंया क्षेत्र राम प्रकाश और क्षेत्रीय लेखपाल रमेश बाबू ने सत्यापित किया था। परंतु अब इसका खेरागढ़ तहसील और कलक्ट्रेट में रिकॉर्ड नहीं मिल रहा। विवादित भूमि का स्वामित्व भी बदल गया है।
रेलवे के पास भी नहीं हैं दस्तावेज
आगरा से धौलपुर तक क्षेत्र पहले मध्य रेलवे के झांसी मंडल में आता था। तब इसका मुख्यालय मुंबई वीटी में था। फिर नए जोन बन गए। अब यह क्षेत्र मध्य रेलवे मुख्यालय प्रयागराज में आता है। ऐसे में जिस भूमि को लेकर विवाद है उसके 1912 और 1959 में हुए अधिग्रहण का रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज रेलवे के पास नहीं मिल रहे।
चाहिए 1959 से पूर्व स्थिति का सत्यापन
रेलवे को अब राजस्व विभाग से 1959 से पूर्व स्थिति का सत्यापित रिकॉर्ड चाहिए। जिलाधिकारी को भेजे पत्र में मंडल इंजीनियर ने जिले के राजस्व विभाग से अधिग्रहित भूमि के सत्यापन की मांग की है। सत्यापित प्रतिलिपियां जिले के 100 साल पुराने भूमि प्लान से उपलब्ध कराने के लिए कहा है।
जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने कहा कि जाजऊ में रेलवे की दो भूमि का विवाद है। रेलवे ने 100 साल पहले भूमि का अधिग्रहण किया था। रिकॉर्ड का दोबारा परीक्षण करा रहे हैं। एडीएम प्रशासन से जांच आख्या मांगी है।