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चिकित्सक की सलाह: जल्दबाजी में खुद नहीं कराना चाहिए एचआरसीटी, इन बातों का रखें ध्यान

Wed, 19 May 2021 12:11 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

डॉ. अजय बुलागन ने बताया कि मरीजों में आरटीपीसीआर की जांच कम वायरल लोड म्यूटेशन स्ट्रेन या तकनीकी खामियों की वजह से नेगेटिव हो जाती है। ऐसे में एचआरसीटी कोरोना की जांच में कारगर साबित हो रही है।
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कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना संक्रमण की जांच के लिए आरटीपीसीआर सर्वाधिक मान्यता प्राप्त जांच है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अजय बुलागन के मुताबिक एचआरसीटी चेस्ट भी आजकल बाकी पैथोलॉजी जांचों व आरटीपीसीआर के साथ एक पूरक जांच की तरह उपयोगी है। एसआरसीटी को चिकित्सीय परामर्श के साथ ठीक से उपयोग किया जाए तो महत्वपूर्ण साबित होती है। जल्दबाजी में खुद एचआरसीटी जांच नहीं करानी चाहिए। 

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डॉ. अजय बुलागन ने बताया कि मरीजों में आरटीपीसीआर की जांच कम वायरल लोड म्यूटेशन स्ट्रेन या तकनीकी खामियों की वजह से नेगेटिव हो जाती है। ऐसे में एचआरसीटी कोरोना की जांच में कारगर साबित हो रही है।

दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोग संक्रमण की चपेट में आए और जांच किट की अनुपलब्धता और पैरामेडिकल स्टाफ पर काम अधिक होने से आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट 48-72 घंटे तक देरी से आ रही है। ऐसे में कोरोना के मरीजों को इलाज में देरी हो जाती है। जो कि मरीज के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। ऐसे में एचआरसीटी की रिपोर्ट जल्द मिल जाती है। मरीज समय से इलाज शुरू कर देता है। 

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बीमारी की स्टेज पता करने में उपयोगी 
डॉ. अजय बुलागन ने बताया कि एचआरसीटी कोरोना की बीमारी की स्टेज और तीव्रता को पता करने में और फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति पता करने में एक्स-रे से ज्यादा उपयोगी है। इससे फेफड़ों में संक्रमण की स्थिति के आधार पर इलाज करने वाला चिकित्सक मरीज को घर पर रहकर इलाज लेने या अस्पताल में भर्ती होने सलाह देता है। जांच से यह भी बताया जा सकता है कि बीमारी मरीज का कितना नुकसान कर सकती है।

इन बातों का ध्यान रखना जरूरी 
- दूसरी लहर में युवा भी कोरोना की चपेट में आ रहे हैं, ऐसे में फेफड़ों का संक्रमण जानना जरूरी है।
- एचआरसीटी उन बीमारियों के बारे में भी पता करने में मदद करता है, जिनमें लक्षण कोरोना जैसे होते हैं। 
- सामान्यता कोरोना संक्रमित होने के तीन से आठ दिन में सीटी स्कैन में संक्रमण की स्थिति का पता चलता है। 
- कई बार मरीजों की आरटीपीसीआर निगेटिव होने के बाद भी कोरोना के लक्षण बने रहते हैं। ऐसे में भ्रम होता है। ऐसे में एचआरसीटी मददगार है।
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