कोरोना की जांच के लिए सैंपल लेता स्वास्थ्य कर्मी। (फाइल)
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कोरोना संक्रमण की जांच के लिए आरटीपीसीआर सर्वाधिक मान्यता प्राप्त जांच है। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. अजय बुलागन के मुताबिक एचआरसीटी चेस्ट भी आजकल बाकी पैथोलॉजी जांचों व आरटीपीसीआर के साथ एक पूरक जांच की तरह उपयोगी है। एसआरसीटी को चिकित्सीय परामर्श के साथ ठीक से उपयोग किया जाए तो महत्वपूर्ण साबित होती है। जल्दबाजी में खुद एचआरसीटी जांच नहीं करानी चाहिए।
डॉ. अजय बुलागन ने बताया कि मरीजों में आरटीपीसीआर की जांच कम वायरल लोड म्यूटेशन स्ट्रेन या तकनीकी खामियों की वजह से नेगेटिव हो जाती है। ऐसे में एचआरसीटी कोरोना की जांच में कारगर साबित हो रही है।
दूसरी लहर में बड़ी संख्या में लोग संक्रमण की चपेट में आए और जांच किट की अनुपलब्धता और पैरामेडिकल स्टाफ पर काम अधिक होने से आरटीपीसीआर की जांच रिपोर्ट 48-72 घंटे तक देरी से आ रही है। ऐसे में कोरोना के मरीजों को इलाज में देरी हो जाती है। जो कि मरीज के लिए घातक सिद्ध हो सकती है। ऐसे में एचआरसीटी की रिपोर्ट जल्द मिल जाती है। मरीज समय से इलाज शुरू कर देता है।