सोरों। राधाष्टमी पर्व के अवसर पर बुधवार को तीर्थनगरी में लाड़ली राधारानी का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिरों में कार्यक्रम हुए। साथ ही भक्तों ने घरों पर भी राधारानी की पूजा की और भजन कीर्तन किए।
हरि की पदी किनारे राधाकृष्ण मंदिर में सेवायत रामप्रकाश चतुुर्वेदी ने मंगला आरती के बाद राधारानी का भव्य श्रृंगार कर भोग लगाया। शाम को महिला श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रांगण में मंगल गीत गाए और लाड़ली के जन्म की खुशियां मनाईं। द्वारिकाधीष मंदिर में भी राधारानी का जन्मोत्व मनाया गया। मंदिर में राधारानी का भव्य श्रृंगार कर आरती उतारी गई। इस अवसर पर सेवायत सुुुशील गौड़ ने राधारानी के व्यक्तित्व को महान बताया।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की आत्मा का नाम श्रीराधा है, श्रीराधा की आत्मा का नाम श्रीकृृष्ण है। राधा तत्व अति गोपनीय है श्रीकृष्ण के हृदय का सार है। श्रीराधा अति भोरी, प्रेममूर्ति, कृष्ण आनंदनी, गोपेश्वरी, रसेश्वरी, ब्रजेश्वरी आदि अनेक नाम हैं। श्याम वाराह मंदिर में सेवायत सागर महाराज ने राधारानी को वृृषभान नंदनी, कीरत किशोरी, ब्रजमंडल अधिश्वरी, श्रीकृृष्ण प्राण प्रिया की उपमा देते हए श्रद्धालुुओं को राधाअष्टमी की शुुभकामनाएं दीं।
मथुरा जाने की इच्छा रही अधूरी
अक्सर ही जन्माष्टमी एवं राधाष्टमी को मथुरा जाते थे। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मथुरा नहीं जा पा रहे हैं। मथुरा जाने की इच्छा अधूरी रह गई। घर पर ही राधारानी की पूजा की। - अंशुल भारद्वाज।
नहीं दिखी पहले सी रौनक
मंदिरों में पहले राधाष्टमी को रात तक रौनक रहती थी। बड़ी संख्या में लोग राधारानी के सजे स्वरूप का दर्शन करने जाते थे। इस बार कोरोना संक्रमण के चलते मंदिरों में पहले जैसी रौनक नहीं दिखी। - मोहनलाल त्रिगुणायत।