उत्तर प्रदेश के आगरा निवासी कमांडर संजीव गुप्ता हर त्योहार पर घर आते थे। लेकिन, इस बार उनके मृत्युदंड की खबर आई। सुनकर परिवार के लोग बिलख पड़े। उनके भतीजे ने बताया कि हंसमुख स्वभाव के चाचा संजीव सभी से ऐसे घुलमिल जाते थे मानो कभी दूर ही न हुए हों। वह कहते थे चाहे कहीं भी रहो लेकिन त्योहार परिवारवालों के साथ मनाओ।
इस दिवाली चाचा की जगह कतर की एक अदालत से उनके मृत्युदंड की खबर आ गई। इससे पूरा परिवार स्तब्ध है। बस दिन-रात भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि कुछ चमत्कार हो जाए। हमारे देश के आठों नौसेना अधिकारी इस मामले से छूटकर अपने घर आ जाएं।
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बताते चलें कि कतर की एक अदालत ने करीब एक साल से कैद आठ भारतीयों को जासूसी के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई है। ये सभी भारतीय नौसेना के काबिल अधिकारी थे। यह स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर कतर की अल दहरा कंपनी में काम करते थे। इन आठ सैनिकों में कमांडर संजीव गुप्ता भी एक हैं। उनके परिजन आगरा के गांधी नगर मोहल्ले में रहते हैं।
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मृत्युदंड की सजा जानने के बाद कमांडर संजीव गुप्ता के 90 वर्षीय पिता आरपी गुप्ता व उनकी मां क्षुब्ध हैं। उनके भतीजे ने यही कहा कि हमें अपनी सरकार पर पूरा भरोसा है। सरकार भी पूरा प्रयास कर रही है। इच्छा है कि जल्द ही चाचा व अन्य अपने घर लौट आएं।
बड़ी बेटी पेशे से अधिवक्ता
कमांडर संजीव गुप्ता की बड़ी बेटी पेशे से अधिवक्ता हैं। मां और छोटी बहन का हाथ थामे भारत और कतर में भागदौड़ कर रही हैं। वह इस प्रयास में हैं कि कहीं से सहायता मिल जाए, जिससे पिता घर लौट सकें।