बल्केश्वर महादेव मंदिर के महंत कपिल नागर ने बताया कि पुष्य नक्षत्र का विशेष महत्व है। अगर यह रवि पुष्य संयोग हो तो महत्व और बढ़ जाता है। रविवार को यह संयोग रहेगा। अगर कोई कार्य नहीं बन रहा है तो उसे इस योग में प्रारंभ कर दें। इस योग में खरीदारी करना उत्तम रहता है।
सबसे खास बात यह है कि इस योग में शुभ कार्य के लिए किसी से मुहूर्त निकलवाने की जरूरत ही नहीं है। सोना-चांदी, आभूषण, वाहन, चल-अचल संपत्ति खरीदने के लिए इस साल का आखिरी सबसे उत्तम मुहूर्त है। वाहनों में सफेद वाहन खरीदना अति उत्तम रहेगा। वहीं यह नक्षत्र धनु, मकर और कन्या राशि के लिए लाभकारी है।
'जो भी खरीदेंगे, अक्षय रहेगा'
ज्योतिषाचार्य अरविंद ने बताया कि पुष्य और रवि पुष्य योग में की गई खरीदारी अक्षय मानी जाती है जिसका कभी क्षय नहीं होता है। मोती, शंख या श्रीयंत्र को प्रतिष्ठान में स्थापित करने से व्यापार में उन्नति और लाभ मिलता है। इस दिन बर्तन, वस्त्र, साज सज्जा का समान खरीदने से जीवन में ऐश्वर्य और प्रगति का अनूठा संबंध चिरकाल तक विद्यमान रहता है। रवि पुष्य योग में अहोई अष्टमी अष्टमी होने के कारण इसका महत्व और बढ़ गया है।
सिद्धि विनायक मंदिर के महंत पंडित ज्ञानेश शास्त्री ने बताया कि पुष्य नक्षत्र ज्योतिष के हिसाब से काफी लाभकारी बताया गया है। रवि पुष्य नक्षत्र इससे भी खास है। पूजा-पाठ और खरीदारी के लिए इस संयोग का काफी महत्व है। इस दिन सोना-चांदी और हीरे के गहने, घरेलू साज सज्जा का सामान, वाहन, चल-अचल संपत्ति खरीदने से परिवार में धन की वृद्धि होती है।
रविवार को रवि पुष्य नक्षत्र रहेगा। ऐसे में सूर्य भगवान की पूजा से उनकी कृपा मिलती है। अगर कोई आर्थिक तंगी से गुजर रहा है तो पुष्य नक्षत्र में विशेष पूजा से तंगी दूर होती है।