बरनाहल (मैनपुरी)। पुलवामा में शहीद रामवकील के शहीद स्मारक के लिए रास्ते का विवाद फिर से गरमा गया है। 11 महीने पहले शासन द्वारा स्मारक के लिए दी गई जमीन के लिए आज तक शहीद की पत्नी को रास्ता नहीं मिल सका है। शहीद की पत्नी ने रास्ते को लेकर राज्यपाल से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 14 फरवरी 2019 को विनायकपुर निवासी सीआरपीएफ जवान रामवकील शहीद हो गए थे। शहीद स्मारक के लिए शासन ने गांव में ही 0.560 हेक्टेयर भूमि आवंटन की थी। इसी भूमि पर शहीद का अंतिम संस्कार किया गया था। इस भूमि के आगे गांव के ही विजयपाल यादव का खेत है। इसलिए स्मारक के लिए रास्ता नहीं है। रास्ता न होने के कारण स्मारक का निर्माण नहीं हो पा रहा है। 11 महीनों से शहीद के परिजन स्मारक के निर्माण व रास्ता देने के लिए शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों के चक्कर काट चुके हैं। अब शहीद की पत्नी व परिजनों ने उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन से मिलकर स्मारक बनाने व रास्ता दिलाए जाने की गुहार लगाई है।
दद्दू प्रसाद के प्रयास भी नहीं साबित हुए कारगर
शहीद स्मारक बनाने को लेकर 17 अगस्त 2019 को स्मारक स्थल पर सामाजिक परिवर्तन मंच के बैनर तले प्रतिरोध सभा का आयोजन किया गया था। इसमें सामाजिक परिवर्तन मंच के संयोजक और पूर्व कैबिनेट मंत्री दद्दू प्रसाद ने सभाकर शासव्न, प्रशासन से रास्ता दिलाने की गुहार लगाई थी।
अनशन भी नहीं आया काम
रास्ते के संबंध में ही 26 अगस्त 2019 को शहीद के परिजनों ने ब्लाक परिसर में अनशन पर बैठने की चेतावनी दे दी थी। अनशन पर बैठने से पहले ही एसडीएम करहल रतन वर्मा ने गांव में पहुंचकर शहीद के परिजनों को समझाकर शांत कराया था। साथ ही शहीद के परिजनों व खेत मालिक विजयपाल यादव को साथ बैठाकर रास्ते के संबंध बीच का रास्ता निकालने पर विचार किया गया था, लेकिन खेत मालिक ने खेत से रास्ता देने से मनाकर दिया था।
मंत्री ने लिखा डीएम को पत्र
शहीद के स्मारक के लिए रास्ता उपलब्ध कराने के लिए जब शहीद की पत्नी गीता देवी ने वित्त, संसदीय कार्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के मंत्री सुरेश कुमार खन्ना से मुलाकात कर उनको ज्ञापन सौंपा था। जिस पर सुरेश कुमार खन्ना ने जिलाधिकारी मैनपुरी को पत्र लिखकर शहीद स्मारक के लिए रास्ता दिलवाने के निर्देश दिए हैं।