थाने-चाैकी में काम का बोझ है। बच्चे और पत्नी से बात नहीं कर पाते हैं। छुट्टी नहीं मिल पाती। ये सभी वजहें कई बार पुलिसकर्मियों में तनाव का कारण बनती हैं। ऐसे में आम जनता से दुर्व्यवहार की घटनाएं सामने आती हैं। हाल ही में हुईं घटनाओं के बाद कमिश्नरेट पुलिस के व्यवहार को बदलने के लिए कवायद शुरू हो गई है। मनोचिकित्सक और व्यवहार विज्ञानियों का विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा।
डीसीपी सिटी सैयद अली अब्बास ने बताया कि कमिश्नरेट में सात हजार से अधिक पुलिसकर्मी हैं। कई बार थानों और चाैकियों में गलत व्यवहार, पिटाई की शिकायत लोग करते हैं। इनकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवहार विज्ञानी डा. नवीन गुप्ता और उनकी टीम के साथ बात की जाएगी। थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरु किया जाएगा। बुधवार को सभी एसीपी के साथ बैठक का भी आयोजन किया गया है।
थाने में योग, ध्यान और खेलकूद
डीसीपी सिटी ने बताया कि बैठक में एसीपी से सुझाव लिए जाएंगे। बात की जाएगी कि अगर कोई पुलिसकर्मी तनाव में है तो उसका कारण क्या है। उसे कम करने के उपाय जानेंगे। क्या थाना स्तर पर हर दिन और सप्ताह में योग कराया जाना चाहिए। पुलिसकर्मियों के खेलने के इंतजाम पर भी बात करेंगे।