रोग प्रतिरोधक क्षमता भी हो रही कम
एसएन मेडिकल कॉलेज की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रुचिका गर्ग ने कहा कि कोख में शिशु के लिए बाहरी वायुमंडल स्वस्थ होना बेहद जरूरी है। गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक प्रदूषित हवा से गर्भस्थ शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। मानसिक-शारीरिक विकास प्रभावित होने के साथ ऐसे बच्चों में भविष्य में मधुमेह, उच्च रक्तचाप और दमा की बीमारी का भी खतरा तीन गुना से अधिक है।
ऑक्सीजन की आपूर्ति होती है प्रभावित
एसएन मेडिकल कॉलेज के वक्ष एवं क्षय रोग विशेषज्ञ डॉ. गजेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि धुआं में कार्बन मोनोऑक्साइड, लैड, कार्बन डाय ऑक्सायड, धूल के 2.5 पीएम से कम कण सांस नलिकाओं को संकुचित कर देती हैं। इससे गर्भस्थ शिशु तक आवश्यक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। इससे हृदय, दिमाग, फेफड़े समेत अन्य शारीरिक विकास भी प्रभावित होता है। प्रदूषित हवा में रहने वाली महिलाओं के शिशुओं में फेफड़े संबंधी बीमारी का खतरा भी अधिक है।
इन बातों का रखें ध्यान
- झाड़ू लगाने, चादर-पर्दे झाड़ते वक्त मुंह ढककर रखें।
- घर में कोई धूम्रपान करें तो उसका विरोध कर बंद करवाएं।
- निर्माण कार्य वाले क्षेत्र में खिड़की-दरवाजे बंद रखें, पर्दे लगाएं।
- धुएं वाले क्षेत्र में जाएं तो मास्क लगाकर रखें, जांच भी कराएं।
- नियमित सांस संबंधी योग करने की आदत डालें।
- घर में हवा की निकासी का बेहतर इंतजाम करें।
(जैसा के वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपमा शर्मा ने बताया)
75 दिन एक्यूआई रहा संतोषजनक
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार मई 2021 से जून 2022 तक महज 75 दिन ही हवा की गुणवता संतोषजनक रही। इन दिनों में एक्यूआई 51 से 100 रहा। महज पांच दिन ही हवा सेहतमंद रही और एक्यूआई 20 से कम रहा। बाकी के 290 दिन एक्यूआई मानक से कई गुना ज्यादा रहा।
दिन एक्यूआई
15 दिन: 401 से 489
26 दिन: 301-400
131 दिन: 201-300
115 दिन: 101-200
75 दिन: 50 से 100
(केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार)
धूम्रपान का पड़ा असर
जगदीशपुरा की 23 साल की गर्भवती महिला का दो महीने पहले एसएन मेडिकल कॉलेज में प्रसव हुआ। इनके शिशु का वजन 2.1 किलो था। इनके पति और ससुर धूम्रपान करते हैं। घर सीमित है और रहने वाले सदस्यों की संख्या भी अधिक है।
मंटोला की 21 साल की गर्भवती महिला ने दूसरे बच्चे को अप्रैल में महिला जिला अस्पताल में जन्म दिया। सवा सात महीने में प्रसव हो गया, शिशु का वजन भी दो किलो था। इन्होंने बताया कि पास में कबाड़ का काम होता है, कई बार तार भी जलाते हैं, धूल-धुएं से परेशान रहते हैं।