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UP: गर्भवती की हो गई मौत, तब पता चला अपंजीकृत है 'उत्तम हॉस्पिटल', अब दर्ज हो सकी एफआईआर

Sat, 23 May 2026 10:21 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के ट्रांस यमुना क्षेत्र में गर्भवती महिला की मौत के मामले में अस्पताल के अपंजीकृत होने का खुलासा हुआ है, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने उसकी सेवाएं बंद करा दी हैं। पीड़ित परिवार ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कार्रवाई में देरी और नामजद आरोपियों को बचाने की कोशिश का दावा किया है।
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Fir demo - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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आगरा के थाना एत्माद्दौला क्षेत्र के ट्रांस यमुना फेज-2 स्थित उत्तम हॉस्पिटल में गर्भवती महिला की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की जांच में अस्पताल अपंजीकृत पाया गया, जिसके बाद अस्पताल की चिकित्सकीय सेवाएं बंद करा दी गईं। वहीं पीड़ित परिवार का आरोप है कि एक महीने से अधिक समय तक न्याय के लिए भटकने के बावजूद पुलिस ने अब तक अस्पताल संचालक, मैनेजर और कथित आरोपी नर्स के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पुलिस आयुक्त के निर्देशन के बाद प्राथमिकी दर्ज हुई। आरोप है तहरीर बदलवाकर पुलिस ने बिना नाम जद प्राथमिकी दर्ज की हैं।
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फिरोजाबाद के थाना टूंडला क्षेत्र के ग्राम उलाऊ निवासी सचिन कुमार ने बताया कि 15 अप्रैल को उन्होंने अपनी चार माह की गर्भवती पत्नी प्रिया यादव को उत्तम हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। अस्पताल प्रशासन ने गर्भपात कराने की बात कहकर करीब 50 हजार रुपये जमा कराए, जबकि महिला चिकित्सक के नाम पर 12 हजार रुपये अलग से लिए गए।



 

पीड़ित का आरोप है कि 16 अप्रैल को अस्पताल में किसी चिकित्सक की मौजूदगी के बिना नर्स द्वारा ऑपरेशन किया गया। कुछ देर बाद खून की जरूरत बताकर परिजनों को बाहर भेज दिया गया। इसी दौरान हालत बिगड़ने पर बिना सूचना दिए प्रिया यादव को शहर के एक निजी अस्पताल भेज दिया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

 

पत्नी की मौत के बाद सचिन कुमार लगातार न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटता रहा। उसने थाना एत्माद्दौला, एसीपी, डीसीपी सिटी और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को कई शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। न्याय नहीं मिलने से परेशान होकर सचिन कुमार ने सीएमओ कार्यालय पहुंचकर हंगामा किया और अधिकारियों पर मामले को दबाने का आरोप लगाया। इसके बाद मामला उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक तक पहुंचा, तब स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया।

 

उधर, पीड़ित का कहना है कि पुलिस आयुक्त के निर्देश के बाद प्राथमिकी तो दर्ज कर ली। लेकिन एफआईआर में अब तक अस्पताल संचालक, मैनेजर और ऑपरेशन करने वाली आरोपी नर्स को नामजद नहीं किया गया है। उनसे जबरन तहरीर बदलवाई गई है।
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सचिन कुमार ने पुलिस आयुक्त को दिए प्रार्थना पत्र में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में अस्पताल को अपंजीकृत बताया गया है, इसके बावजूद आरोपियों को पुलिस बचाने की कोशिश की जा रही है। थानाध्यक्ष ने बताया कि मामले की जांच जारी है। प्राथमिकी दर्ज कर ली है।उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी
 
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