मैनपुरी। ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़े की शिकायतों की जांच में पंचायत सचिव रोड़ा अटका रहे हैं। अभिलेख उपलब्ध न कराए जाने के चलते महीनों से जांचें लटकी पड़ी हैं। लेकिन इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।
जिले में अब तक 96 ग्राम पंचायतों में फर्जीवाड़ा करने की शिकायतें की गईं। इनमें मुख्य विकास अधिकारी ने जांच के आदेश दिए थे। जांच अधिकारियों को जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी भेजे गए। इसके बाद भी केवल 46 ग्राम पंचायतों की ही जांच रिपोर्ट प्राप्त हो सकी। हाल ही में सीडीओ नगेंद्र शर्मा ने 13 जांच अधिकारियों का वेतन रोक दिया था। लेकिन जांच में रोड़ा अटकाने वाले पंचायत सचिवों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। दरअसल अधिकांश ग्राम पंचायतों की जांच इसीलिए लंबित है क्योंकि पंचायत सचिव कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। इससे जांच महीनों से रुकी हुई हैं। कई बार जांच अधिकारी सचिवों को इसके लिए पत्र भेज चुके हैं। सचिवों को कार्रवाई का भी कोई डर नहीं है, क्योंकि अब तक अभिलेख न देने पर उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। कहीं न कहीं सचिव इसलिए अभिलेख नहीं दे रहे हैं, क्योंकि अगर जांच पूरी हो गई तो उनके कारनामे खुलकर सामने आ जाएंगे।
ये भी है नियम
ग्राम पंचायतों में जो भी कार्य कराए जाते हैं, उसके अभिलेख पंचायत सचिव के पास होते हैं। नियमानुसार वित्तीय वर्ष समाप्त होने पर पंचायत सचिवों को ये अभिलेख ब्लॉक पर बने अभिलेखागार में जमा करा देने चाहिए। बावजूद ये काम नहीं हो पा रहा है। अगर अभिलेख ब्लॉक पर जमा हों तो उन्हें जांच अधिकारी को आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।
केस एक
करहल की ग्राम पंचायत औन्हां की जांच के लिए कई बार सचिव से अभिलेख मांगे गए। अभिलेख पूरे न मिलने पर उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर ही जांच की गई। बाद में अधिकारियों ने दोबारा जांच के आदेश दिए। तब से अभिलेखों की अभाव में छह माह से जांच लटकी हुई है।
केस दो
ग्राम पंचायत सुल्तानगंज में घोटाले की शिकायत पर जांच के आदेश दिए गए थे। जांच अधिकारी ने कई बार पंचायत सचिव व अन्य अधिकारियों को अभिलेख उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजा। अभिलेख नहीं मिलने से पांच माह से जांच लटकी हुई है।