अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र, पेरू की मदद से सींगना में शुरू होने जा रही शोध शाखा के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने 111.5 करोड़ रुपये मंजूर किया है। 138 हेक्टेयर में फैले इस आलू फार्म में 10 हेक्टेयर भूमि में आलू पर नए-नए शोध होंगे। उप निदेशक उद्यान डॉ. धर्मपाल सिंह ने बताया कि आगरा के मौसम के हिसाब से आलू बीज तैयार किया जाएगा। कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु में कई जगह खरीफ में आलू फसल हो रही है। साथ ही पोषण तत्वों से युक्त आलू की पैदावार पर सबसे ज्यादा जोर है। आलू की ऐसी वैरायटी आगरा क्षेत्र में पैदा होंगी जिनमें जिंक, आयरन, मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व होंगे।
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अधिक तापमान पर किया जा सके स्टोर
आगरा कोल्ड स्टोर एसोसिएशन के अध्यक्ष भुवेश अग्रवाल ने बताया कि जिले में 325 कोल्ड स्टोर हैं। 6 करोड़ पैकेट आलू भंडारण क्षमता है। एक पैकेट में 50 किलो आलू होता है। अभी 3 डिग्री पर आलू रखना पड़ता है। कोल्ड स्टोर में तापमान अधिक होने से आलू मीठा होने लगता है। ऐसे आलू की वैरायटी पैदा की जाए जिसे 10 से 12 डिग्री तापमान पर रखा जा सके।
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बागवानी से निकालकर कृषि क्षेत्र में शामिल हो आलू
समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय महासचिव व राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने कहा कि आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र को हरी झंडी मिल गई। लेकिन, 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगरा कोठी मीना बाजार मैदान पर गुजरात के बनासकाठा की तर्ज पर आलू प्रसंस्करण केंद्र खोलने की जो घोषणा की गई थी, वह अधूरी है। उन्होंने कहा आलू को बागवानी से निकालकर कृषि क्षेत्र में शामिल किया जाए। उत्तर प्रदेश सरकार आलू के लिए नीति बनाए। इस तरह की तकनीक विकसित की जाए जिससे यह पता चल सके कि देश मेें आलू कितनी जरूरत है। कितना आलू निर्यात होगा। कितना आलू प्रसंस्करण किया जाए। चीन व अन्य देश इसी तरह से उत्पादन करते हैं। इससे आलू किसानों को फायदा होगा। आलू सड़ेगा भी नहीं।