फिरोजाबाद। सितंबर एवं अक्तूबर माह में बारिश और उचित दाम नहीं मिलने के कारण इस बार किसानों का आलू की फसल से मोहभंग हो गया है। आलू की खेती पर निर्भर रहने वाले किसान अब सरसों की फसल पर दांव लगा रहे हैं। ऐसे में जिले में आलू का रकबा करीब पांच से सात हजार हेक्टेयर कम गया है। ऐसे में कोल्ड स्टोरेज संचालकों के सामने मुसीबत खड़ी हो गई है।
जिला आलू उत्पादन का हब है। सिरसागंज, नारखी, हाथवंत, मटसेना एवं नारखी क्षेत्र में बड़ी मात्रा में आलू का उत्पादन में होता है। हालांकि इस बार सितंबर और अक्तूबर माह में झमाझम बारिश होने से आलू किसानों को परेशानी हुई। ऐसे में आलू किसानों का रुख सरसों की फसल की ओर हो गया। ऐसे में सरसों की फसल का रकबा बढ़ गया। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाजार में इस बार सरसों का भाव ठीक रहा। बता दें कि जिले में आलू की फसल का रकबा साठ से 65 हजार हेक्टेयर तक था।
- बोले किसान......
- आलू की फसल की लागत लगातार बढ़ती जा रही है। खाद, बीज, जोताई और सिंचाई सभी कुछ महंगा हो गया है। वर्ष के अंत तक भाव काफी कम होने के कारण किसानों का आलू की फसल से मोहभंग हो गया है। इस कारण रकबा घट रहा है।
अनिल सिंह केसरी
- सब्जियों के राजा आलू से किसानों को उम्मीद तो बहुत थी लेकिन अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में आलू का भाव जमीन पर आ गया। ऐसा लगा कि कोल्ड के बाहर आलू फिंकेगा लेकिन बारिश ने दाम बढ़ा दिए। हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में किसानों ने आलू के बजाय सरसों बोई है।
आमोद भाटी सिरसागंज
बोले कोल्डसंचालक,...
- आलू की फसल की बुवाई का क्षेत्रफल घटने की सूचना मिल रही है। किसानों ने इस बार खाली खेतों में सरसों की फसल बोई है। आलू का रकबा घटना कोल्ड संचालकों के लिए चिंता का कारण है। हालांकि पैदावार ठीक हुई तो कोल्ड स्टोरेज हाउसफुल रहेंगे।
अनुराग सिंह कोल्ड संचालक
- आलू की दरें कम होने के बाद आलू का क्षेत्रफल काफी तेजी से घटने की उम्मीद थी लेकिन बारिश से आलू की कीमतों ने उछाल मारा है। इससे किसानों की सोच बदल गई। आलू रकबा घटने की आशंका थी लेकिन लगभग पिछले वर्ष जैसी स्थिति में रहेगा। हालांकि जिले में सरसों का रकबा बढ़ा है।
पंकज गर्ग कोल्ड स्टोरेज संचालक
---एक नजर में जिले के कोल्ड-----
-जिले में साठ हजार हेक्टेयर में बोई जाती है आलू की फसल।
-जिले के दो लाख से अधिक किसान परिवारों का है इससे जुड़ाव।
-जिले में 150 से अधिक कोल्ड स्टोरेज हैं स्थापित।
-इनमें 13 लाख मीट्रिक टन से अधिक आलू रखने की है क्षमता।
- जिले में आलू का रकबा घटने की संभावना है। बारिश होने के कारण सरसों का क्षेत्रफल बढ़ा है। डीएपी की किल्लत के कारण पहले किसानों को दिक्कत हुई थी और किसान का रुख दूसरी फसलों की ओर हुआ है। आलू की लेट बुवाई होने से कुछ सुधार की उम्मीद है।
डा.संजीव वर्मा जिला उद्यान अधिकारी फिरोजाबाद।