आगरा में बेहद सूक्ष्म कणों पीएम 2.5 और पीएम-10 की भारी मौजूदगी के कारण शहर के चौराहों पर सांस लेना मुश्किल है। इनमें सबसे ज्यादा धूल और सूक्ष्म कण रोहता, शाहदरा, पृथ्वीनाथ फाटक, सिकंदरा और भगवान टॉकीज चौराहे पर है। इन जगहों पर मानक से सिल्ट लोड 20 गुना तक ज्यादा है। यह खुलासा आईआईटी कानपुर के प्रो. मुकेश शर्मा की स्टडी रिपोर्ट में हुआ है, जिसे ताज ट्रिपेजियम जोन अथॉरिटी को सौंपा गया है। टीटीजेड अथॉरिटी ने यह स्टडी ताजमहल के पास पहुंच रहे प्रदूषण के कारण और दिशाओं को जानने के लिए कराई थी। आईआईटी कानपुर ने शहर में प्रदूषण के कारणों पर विस्तृत रिपोर्ट जारी की है, जिसमें समाधान भी सुझाए गए हैं।
आईआईटी कानपुर ने शहर के 16 चौराहों पर प्रदूषण की स्थिति जांची, जिसमें पाया गया कि रोहता रोड, शाहदरा चुंगी और पृथ्वीनाथ फाटक पर सबसे ज्यादा धूल और सूक्ष्म कण हैं। स्टडी रिपोर्ट में इसे सिल्ट लोड का नाम दिया गया। यह लोड 3 ग्राम प्रति वर्ग मीटर से कम होनी चाहिए, लेकिन यह 20 गुना से ज्यादा है। ताजमहल पश्चिमी गेट, सर्किट हाउस, सुभाष पार्क, आगरा फोर्ट, ताजमहल पूर्वी गेट पर ही यह 10 ग्राम प्रति वर्ग मीटर के आसपास है।
| स्थान | धूल कण घनत्व |
| रोहता रोड | 55.1 |
| शाहदरा चुंगी | 48.5 |
| पृथ्वीनाथ फाटक | 45.2 |
| सिकंदरा | 39.2 |
| भगवान टॉकीज | 30.7 |
| रामबाग चौराहा | 24.5 |
| बोदला चौराहा | 20.6 |
| घटिया आजम खां | 19.2 |
| हरीपर्वत | 13.75 |
- सड़क किनारे पौधे लगाए जाएं
- साइड पटरियों पर सीमेंट टाइल लगाएं
- रोजाना मशीनों से वैक्यूम स्वीपिंग की जाए
- पानी का छिड़काव साइड पटरियों पर करें
- जहां सिल्ट लोड ज्यादा, कई बार छिड़काव करें
आईआईटी कानपुर ने अपनी स्टडी रिपोर्ट में ट्रैफिक जाम के कारण हो रहे प्रदूषण से निपटने के लिए बिजलीघर और ईदगाह बस अड्डे को शिफ्ट करने का सुझाव दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिजलीधर बस अडडे को ट्रांसयमुना की ओर तथा ईदगाह बस अड्डे को पथौली गांव, जयपुर रोड पर शिफ्ट किया जाए। इसके साथ ही कीठम से ग्वालियर रोड को जोड़ने वाले दक्षिणी बाईपास का उपयोग बढ़ाने, शहर के अंदर भारी वाहनों का प्रवेश रोकने और इनर रिंग रोड को आगरा जयपुर हाइवे तक जोड़ने की सिफारिश की गई है। कचरे को जलाने से रोकने के लिए सख्ती बरतने को कहा गया है।