एटा जिले में छेड़छाड़ के मामले में बिना जांच आरोपी आरटीआई कार्यकर्ता की गिरफ्तारी और उसे हथकड़ी लगाकर न्यायालय में पेश करना पुलिस को महंगा पड़ गया। इस मामले में मानवाधिकार आयोग ने पुलिसकर्मियों पर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
यह था मामला
मामला जून 2016 का है। 22 जून की रात तीन युवकों के खिलाफ एक युवती ने थाना जैथरा में छेड़छाड़ की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें कस्बा के मोहल्ला नेहरू नगर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुनील को भी आरोपी बनाया गया। पुलिस ने 23 जून की सुबह ही सुनील को गिरफ्तार कर लिया। यही नहीं अगले दिन 24 जून को हथकड़ी लगाकर सुनील को पहले जिला अस्पताल और बाद में अदालत ले जाया गया।
इस मामले में बाद में सुनील ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की। दोबारा कराई गई विवेचना में सुनील की भूमिका न पाते हुए विवेचना से नाम हटा दिया गया। बिना किसी कसूर के अपने साथ हुई ज्यादती और पुलिस द्वारा उत्पीड़न के विरोध में सुनील ने मानवाधिकार आयोग में अर्जी लगाई। इस पर आयोग ने तल्ख टिप्पणी की है।