हत्याकांड में कलक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मृतक के ससुर बृजेंद्र सिंह रावत, साले कृष्णा रावत और पत्नी प्रियंका को नामजद किया गया। पुलिस ने कृष्णा रावत को जेल भेजा दिया। उधर, पत्नी प्रियंका पुलिस के सामने नहीं आई है। परिजन ने यही बताया कि उसकी तबीयत खराब है। पति की मौत के बाद से वह सदमे में हैं। उनका उपचार चल रहा है।
डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि मृतक की पत्नी से पूछताछ की जानी है। हत्या के समय वो भी घर में मौजूद थीं। उन्हें बयान देने के लिए नोटिस दिया गया है। इसके अलावा अन्य बिंदुओं पर पुलिस की जांच चल रही है। हत्या का मुकदमा दर्ज होने से एक दिन पहले प्रियंका की ओर से ससुरालियों पर दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसकी भी विवेचना की जाएगी। क्राइम सीन भी दोहराया जाएगा।
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मृतक सचिन उपाध्याय के पिता केशव देव ने आरोप लगाया कि पुलिस ने घटना के पहले दिन से ही लापरवाही की। बेटे की गर्दन पर घोंटने का निशान था। इसके बावजूद पुलिस ने किसी आरोपी को पकड़ा नहीं। 13 अक्तूबर को पोस्टमार्टम के बाद 14 अक्तूबर को ही रिपोर्ट मिल गई थी। मगर, पुलिस इंतजार करती रही। वह तहरीर लेकर घूमते रहे।
पहले पुलिस ने मृत्यु का समय नहीं होने का बहाना बनाया। जब समय भी डलवा दिया गया तो मुकदमा लिखने में भी तीन दिन लगा दिए। उनकी तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने से पहले आरोपी पक्ष की तरफ से ही उनके खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
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बहू प्रियंका के भी अस्पताल में भर्ती होने की बात कही जा रही है। अगर, वो भर्ती हैं तो कहां पर हैं और पुलिस गिरफ्तारी क्यों नहीं कर रही है। जब आरोपी कृष्णा की गिरफ्तारी हुई तो नाटकीय तरीके से जेल भेज दिया गया। इसकी किसी को भनक तक नहीं लगने दी गई। अब नामजद आरोपियों को गिरफ्तार तक नहीं किया जा रहा है।