मैनपुरी। अदालत की फटकार और फरियादियों की शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन ने 14 मामलों की पुन: विवेचना का निर्णय लिया है। इनमें दहेज हत्या, हत्या और युवती को भगाने के मामले शामिल हैं। दोबारा कराई गई विवेचना में अगर गड़बड़ी मिलती है तो विवेचक पर भी कार्रवाई होना तय है। हालांकि अभी तक पुलिस प्रशासन ने यह जानकारी नहीं दी है कि आखिर कौन से चौदह मामलों की जांच होगी।
आरोपियों से साठगांठ कर मामलों में एक तरफा एफआर लगाने के आरोप आए दिन पुलिस पर लगते रहते हैं। अदालतों में भी ऐसे मामलों को चुनौती देते हुए वादी पक्ष की ओर से पुन: जांच की मांग की गई है। अब पुलिस प्रशासन ने गंभीरता दिखाते हुए ऐसे मामले चिह्नित करने शुरू कर दिए हैं, जिनकी जांच पर सवाल खड़े हुए हैं। फिलहाल पुलिस ने 14 मामले चिह्नित किए हैं। जल्द ही इन मामलों की दूसरे विवेचकों से जांच कराई जाएगी। इन मामलों की निगरानी खुद आला अफसरों द्वारा की जाएगी।
कोर्ट से होने वाली फजीहत से बचेंगे
मामलों में जब पुलिस एफआर आदि की कार्रवाई कर न्यायालय में पहुंचती है, तो वहां वादी की ओर से साठगांठ के आरोप लगाए जाते हैं। पुलिस की एफआर पर सवाल उठने के बाद जहां पुलिस की फजीहत होती है। यदि आधिकारिक स्तर पर पुन: विवेचना की प्रक्रिया शुरू होगी तो निश्चित तौर पर पुलिस कोर्ट में होने वाली फजीहत से बच सकेगी।
एसपी ने पकड़े थे 16 मामले
एसपी अजय शंकर राय ने मई वर्ष 2018 में ऐसे 16 मामले पकड़े थे, जिनमें युवती और किशोरी के घर से चले जाने के मामलों में विवेचक द्वारा बगैर तलाश ही एफआर लगा दी थी। इस मामले में एसपी ने विवेचकों से स्पष्टीकरण भी मांगा था।
केस-एक
शहर के राजा का बाग निवासी सोनू राठौर को बीते वर्ष दीवानी से घर आते समय गोली मार दी गई थी। सोनू ने नामजद लोगों के विरुद्ध रिपोर्ट लिखाई। पुलिस ने इस मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी। कोर्ट ने एफआर नामंजूर कर अग्रिम विवेचना के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस ने गवाहों के बयानों के आधार पर इस मामले में चार्जशीट लगा दी। मुकदमा अदालत में विचाराधीन है।
केस -दो
थाना कोतवाली के परौंख निवासी पुष्पेंद्र सिंह ने वर्ष 2018 में हत्या की एक रिपोर्ट कोतवाली में दर्ज कराई। पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में भी एफआर लगा दी। वादी पक्ष पुलिस की जांच रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं था। पुन: विवेचना की अफसरों से मांग की गई, लेकिन अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। कोर्ट से एफआर नामंजूर होने के बाद अग्रिम विवेचना में पुलिस ने चार्जशीट लगाई। यह मामला भी विचाराधीन है।
कोर्ट की ओर से यदि मामले में पुन: विवेचना के निर्देश दिए जाते हैं तो उस पर दोबारा जांच की जाती है। यदि वादी की ओर से शिकायत की जाएगी तो पुलिस संज्ञान लेगी। फिलहाल कुछ मामले पुन: जांच के लिए चिह्नित किए गए हैं।
ओमप्रकाश सिंह, एएसपी