कोर्ट ने वर्ष 2007 में सैंया क्षेत्र में युवक की हत्या के मामले में आरोपी कुख्यात गुड्डन काछी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मामले में पुलिस ने केस डायरी प्रस्तुत नहीं की। हत्या में प्रयुक्त हथियार भी बरामद नहीं किया जा सका। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ियां जोड़ने में भी नाकाम रही। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था।
मामले में अभियोजन पक्ष की तरफ से गवाही के लिए रघुवीर सिंह, मीना, डॉ. आलोक कुमार, विवेचक मनोहर सिंह, विवेचक राजेश कुमार, हेड कांस्टेबल प्रमोद कुमार और हरिकेश को अदालत में पेश किया। मामले में अभियोजन पक्ष केस डायरी अदालत में पेश नहीं कर सका। विवेचक ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आरोपी की किस प्रकार वाद में संलिप्तता पाई गई। पुलिस हत्या में प्रयुक्त कोई हथियार भी बरामद नहीं कर सकी। घटना का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था। इस परिस्थितिजन्य साक्ष्य की कोई भी कड़ी एक दूसरे से न जुड़ पाने के आधार पर अपर जिला जज विकास वर्मा ने आरोपी को बरी करने के आदेश किए। अन्य दो आरोपियों मलखान और लोटन की पत्रावली अलग करने के कारण वाद में गुड्डन काछी का ही विचारण हुआ।